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कांग्रेस में अध्यक्ष का चुनाव और राजस्थान सरकार में मुख्यमंत्री पद का फैसला अभी तक उलझा हुआ दिखाई दे रहा है. लेकिन उम्मीद है कि अगले 1 या 2 दिन में तस्वीर कुछ हद तक साफ हो जाएगी. बुधवार देर रात दिल्ली पहुंचने के बाद एयरपोर्ट पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि गुरुवार को सोनिया गांधी से मुलाकात करेंगे.

गहलोत ने कहा कि हमारे दिल के अंदर नंबर वन जो होता है उनकी अगुवाई में हम काम करते हैं. आगे भी सोनिया गांधी के नेतृत्व में हम एकजुट रहेंगे. कांग्रेस में हमेशा डिसिप्लिन रहा है, पार्टी आज संकट में है. इस पूरे घटनाक्रम को लेकर मीडिया का अपना दृष्टिकोण हो सकता है. घर की बातें हैं, इंटरनल पॉलिटिक्स में यह सब चलता रहता है. यह सब सॉल्व कर लेंगे. यह मैं कह सकता हूं. राजस्थान के विवाद पर पहली बार बयान दिया है. इससे पहले दिल्ली एयरपोर्ट पर उनका स्वागत विधायक दानिश अबरार, चेतन डूडी ने किया.

दूसरी तरफ बात कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर की जाए तो कई नामों को लेकर चर्चाएं हो रही हैं, दिग्विजय सिंह का भी नाम चल रहा है. भारत जोड़ो यात्रा छोड़कर वह दिल्ली जा रहे हैं. उन्होंने केरल में मीडिया से बात करते हुए कहा है कि वह अध्यक्ष पद के लिए नॉमिनेशन कर सकते हैं. बता दें कि दिग्विजय सिंह 10 साल तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं. उन्हें सोनिया गांधी और राहुल गांधी दोनों का करीबी माना जाता है. 8 साल से केंद्र की सत्ता से बाहर कांग्रेस के नेतृत्व ने दिग्विजय सिंह को ही राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का इंचार्ज बनाया है.

10 सालों तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह के पास अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में महासचिव रहते हुए अनेक राज्यों का प्रभार रहा है. वह महाराष्ट्र, यूपी, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, गोवा, तेलंगाना और असम जैसे राज्यों के प्रभारी भी रह चुके हैं. कश्मीर से कन्याकुमारी तक वह एक जाना पहचाना नाम हैं. उनका 1 प्लस पॉइंट हिंदी और अंग्रेजी पर समान अधिकार होना भी है. गांधी नेहरू परिवार से नजदीकी के अलावा दिग्विजय सिंह का एक अन्य प्लस्पॉइंट बड़े से बड़ा आरोप लगने पर आपा नहीं खोना है. वह संयमित और तर्कसंगत तरीके से राजनीतिक आरोप और प्रतिनिधियों को शालीनता के साथ जवाब देते हैं.

अब देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस का अगला अध्यक्ष कौन बनता है, क्योंकि अगर दिग्विजय सिंह कांग्रेस के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ते हैं तो मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना है. दूसरी तरफ शशि थरूर भी अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ रहे हैं और अभी भी राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है. राजस्थान में जिस तरह से विधायकों ने अपनी अलग मीटिंग की उससे गहलोत से आलाकमान नाराज बताया जा रहा है. ऐसे में अगर गहलोत अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ते हैं तो उन्हें कार्यकर्ताओं का कितना समर्थन मिलता है यह भी देखना दिलचस्प होगा.

दूसरी तरफ अगर बात दिग्विजय सिंह के कमजोर पक्ष की की जाए तो उनके बयान काफी सुर्खियों में रहे हैं. उनकी छवि मुस्लिम परस्त बना दी गई है. कमजोर पड़ चुका राजनीतिक प्रबंधन और दिल्ली में अनेक बड़े कांग्रेसी नेता एवं धडों का उन से दूर होना है. भले ही दिग्विजय सिंह पर मुस्लिम परस्त होने के आरोप लगते हैं लेकिन वह सनातन धर्म को मानने वाले कांग्रेस के अगुआ नेता हैं. राजस्थान में जो कुछ भी हुआ है उससे अशोक गहलोत की छवि को धक्का लगा है और समीकरण बदले हैं. ऐसी स्थिति में अगर दिग्विजय सिंह चुनाव लड़ने के लिए तैयार हुए हैं तो कहीं ना कहीं इसके पीछे जीत का भरोसा होगा ही. देखते हैं कांग्रेस का उलझा हुआ गणित कैसे सुलझता है.

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