Rahul Gandhi

2014 के बाद पहली बार ऐसा लग रहा है कि बीजेपी बैकफुट पर है. बीजेपी को पहला झटका बिहार के अंदर नीतीश कुमार ने दिया. उन्होंने बीजेपी से गठबंधन तोड़ कर आरजेडी और कांग्रेस के साथ फिर से सरकार बना ली. उसके बाद उन्होंने दिल्ली में कई नेताओं से मुलाकात की, जिसमें सबसे पहले उन्होंने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) से मुलाकात की. इसके बाद अन्य दल के नेताओं से भी मुलाकात की. बीजेपी के हाथ से बिहार की सत्ता चली गई और एक पुराना गठबंधन का साथी भी साथ छोड़ कर चला गया.

बीजेपी को दूसरा बड़ा झटका लगता हुआ दिखाई दे रहा है राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा से. क्योंकि जिस तरह से इस यात्रा के शुरुआती दिनों में राहुल गांधी को समर्थन मिला है और जिस तरह से कांग्रेस ने इस यात्रा का प्रचार प्रसार किया है उससे बीजेपी के अंदर खलबली मची हुई है. कांग्रेस इस वक्त आक्रामक मुद्रा में नजर आ रही है. बीजेपी के हर वार पर दुगनी ताकत से कांग्रेस पलटवार कर रही है. इस यात्रा की शुरुआत जिन मुद्दों को लेकर हुई है उससे भटकाने के लिए भी बीजेपी ने कई चालें चली, लेकिन उसे कामयाबी नहीं मिली. चाहे वह टी शर्ट का मुद्दा हो या फिर चर्च के पादरी का मुद्दा, बीजेपी को वह कामयाबी नहीं मिली जिसकी उसे उम्मीद थी.

2024 के लोकसभा चुनावों में ज्यादा वक्त नहीं है और कांग्रेस की यह भारत जोड़ो यात्रा कांग्रेस के अंदर एक नई ऊर्जा का संचार कर सकती है. राहुल गांधी की लोकप्रियता में इस यात्रा के शुरू होने के बाद इजाफा होता हुआ दिखाई दे रहा है और यह बीजेपी के लिए, बीजेपी के चाणक्य अमित शाह के लिए और प्रधानमंत्री मोदी के लिए खतरे की घंटी से कम नहीं है. लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी इन सब से निपटने के लिए 2024 के चुनावों में अपने तुरुप का इक्का का इस्तेमाल कर सकती है.

बीजेपी का तुरुप का इक्का क्या है यह जानने से पहले यह बताना जरूरी है कि प्रधानमंत्री मोदी 2024 के चुनावों के वक्त जब जनता के बीच वोट मांगने के लिए जाएंगे तो उन्हें पिछले 10 साल का हिसाब देना होगा. या यूं कहें कि दो बार देश का प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने देश के लिए कौन सा बड़ा काम किया है, जनता की परेशानियों को कम करने के लिए, महंगाई कम करने के लिए, रोजगार पैदा करने के लिए, चीन को उसी की भाषा में जवाब देने के लिए अपनी तरफ से क्या प्रयास किया है, यह सब कुछ बताना पड़ेगा और बीजेपी के पास जनता को बताने के लिए कोई ठोस काम नहीं है सिवाय धार्मिक मुद्दों के अलावा.

पिछले कुछ वक्त से देखा जा रहा है कि बीजेपी ने कई मुद्दों को पिछले कुछ महीनों में या सालों में आजमाया है और यह सब कुछ इसी वजह से किया गया है कि 2024 के चुनावों में एक बार फिर से गद्दी हथियाने के लिए कौन सा मुद्दा ज्यादा प्रभावी होगा. कर्नाटक के अंदर सावरकर के मुद्दे पर बीजेपी आक्रामक दिखाई दे रही है और कांग्रेस से राजनीतिक लड़ाई उसकी जारी है. इसके अलावा हिजाब भी मुद्दा बनाया गया था, लेकिन फिलहाल इस पर काम बंद है, ऐसा प्रतीत हो रहा है. एक बड़ा मुद्दा बुलडोजर को लेकर बनाया गया है दिखाया गया है और प्रचारित किया गया है.

देश के अंदर के लोग भी और दुनिया के लोग भी बुलडोजर पॉलिटिक्स को भलीभांति समझ रहे हैं. सभी को समझ में आ रहा है कि इस बुलडोजर का इस्तेमाल आखिर किसके ऊपर अधिक हो रहा है और इसके पीछे क्या राजनीति है और इस बुलडोजर पॉलिटिक्स से किसको लाभ हो रहा है. इसके अलावा ज्ञानवापी मस्जिद का मुद्दा भी 2024 तक चलेगा यह साफ दिखाई दे रहा है. 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले अयोध्या मंदिर भी बनकर तैयार हो जाएगा और बीजेपी इसे भी मुद्दा बनाने में 2024 के लोकसभा चुनाव में कोई कसर नहीं छोड़ेगी.

कुल मिलाकर देखा जाए तो 2024 के चुनाव में जब बीजेपी प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह जनता से वोट मांगने के लिए जाएंगे तो उनके पास कोई बड़ा काम दिखाने के लिए नहीं है सिवाय ध्रुवीकरण के और ध्रुवीकरण का कार्ड जब-जब बीजेपी ने खेला है तब तब उसे बड़ी सफलता हाथ लगी है. राम जन्मभूमि पर मंदिर बनाया जा रहा है, 2024 से पहले बनकर तैयार हो जाएगा. बीजेपी इस मुद्दे पर वोट मांगेगी. ज्ञान व्यापी को भी बड़ा मुद्दा बनाया जाएगा. इसके अलावा बुलडोजर पॉलिटिक्स भी कमाल दिखाएगी 2024 में. धारा 370 भी बीजेपी की ध्रुवीकरण राजनीति का ही एक हिस्सा है और इसके ऊपर भी 2024 में बीजेपी वोट मांगेगी.

भारत जोड़ो यात्रा पर राहुल गांधी निकल चुके हैं. इस यात्रा से 2024 में कांग्रेस के लिए क्या निकलेगा यह तो आने वाला वक्त बताएगा. लेकिन राहुल गांधी लगातार R.S.S. पर, सावरकर पर हमले बोलते रहे हैं और इस यात्रा की शुरुआत में ही R.S.S. के ड्रेस कोड को लेकर कांग्रेस के ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट किया गया है, जिसे मीडिया ने मुद्दा बनाने की कोशिश की. कई मीडिया चैनलों पर डिबेट भी हुई. जहां-जहां सावरकर, R.S.S., मंदिर-मस्जिद जैसे ध्रुवीकरण वाले मुद्दे पर डिबेट होगी, राजनीति होगी, वहां वहां बीजेपी को बड़े पैमाने पर लाभ होगा और बीजेपी यही चाहती है कि राहुल गांधी इन्हीं मुद्दों पर बयानबाजी करते रहें.

कांग्रेस को और राहुल गांधी को जनता से जुड़े हुए मुद्दों पर 2019 में सफलता नहीं मिली थी, लेकिन उन्हीं मुद्दों पर फोकस करते हुए यह यात्रा जारी रही तो 2024 में कहीं ना कहीं बीजेपी को बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. इसलिए कांग्रेस को कोशिश करनी चाहिए कि बीजेपी की परेशानियों को बढ़ाते हुए इन्हीं मुद्दों पर फोकस करना चाहिए और बीजेपी के, अमित शाह के ट्रैप में फंसने से बचना चाहिए और यह उम्मीद भी है कि राहुल गांधी इन बातों को भलीभांति समझ रहे होंगे.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here