rajasthan political crisis 2022

अजय माकन और खड़गे ने जयपुर में जो “बगावत” (Rajasthan Political Crisis 2022) हुई उस पर कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व को अपनी रिपोर्ट दे दी है. कहा जा रहा है कि इस रिपोर्ट में अशोक गहलोत पर एक्शन नहीं लेने की अनुशंसा की गई है. लेकिन गहलोत के तीन करीबियों पर एक्शन लेने की सिफारिश की गई है. शांति धारीवाल वह हैं जिनके घर गहलोत समर्थक विधायक बैठे रहे और उधर माकन खड़गे विधायकों के आने का इंतजार करते रह गए. पार्टी इन तीनों को नोटिस भी दे चुकी है. इन्हें अनुशासनहीनता पर जवाब देने के लिए 10 दिन का समय दिया गया है.

कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व क्या चाहता है?

दरअसल कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व चाह रहा था कि अशोक गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लड़े और राजस्थान के मुख्यमंत्री पद को छोड़ दें. केंद्रीय नेतृत्व सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाना चाहता था. लेकिन यह जगजाहिर है कि अशोक गहलोत ऐसा नहीं चाहते हैं. गहलोत के समर्थक विधायकों ने साफ कहा कि गहलोत अध्यक्ष बन भी जाते हैं तो उन्हें राजस्थान का मुख्यमंत्री रहना चाहिए. अगर यह किसी तरह भी संभव नहीं है तो राजस्थान के विधायकों को ही मुख्यमंत्री चुनने का अधिकार होना चाहिए ना कि यह फैसला दिल्ली में होना चाहिए.

जिस तरीके से अशोक गहलोत पर अभी हाल फिलहाल सीधी कार्यवाही नहीं हुई है उससे ऐसा लग रहा है कि राजस्थान में किसी बड़े संकट को टालने और फेस सेविंग के लिए गहलोत को बख्श दिया गया है. सियासी गलियारों में यह भी चर्चा है कि भले ही गहलोत के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है लेकिन कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व उनसे नाराज है, लिहाजा अब वह अध्यक्ष पद की दौड़ से बाहर हो गए हैं. अगर ऐसा हुआ तो पहली बात यह कि गहलोत जो चाहते थे वही हो रहा है. गहलोत ने खुलेआम कहा था कि उन्होंने राहुल गांधी से अध्यक्ष बनने की गुजारिश की थी और वह राजस्थान में ही रहना चाहते हैं.

अगर अशोक गहलोत मुख्यमंत्री बने रह जाते हैं तो यह साफ हो जाएगा कि सचिन पायलट से हुई जंग में गहलोत एक बार फिर बाजी मार ले जाएंगे कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के चाहने के बाद भी अगर सचिन मुख्यमंत्री नहीं बन पा रहे हैं तो अब उनके लिए शायद आगे का रास्ता बेहद कठिन हो गया है. लेकिन अभी राजस्थान के मुख्यमंत्री पद के लिए कांग्रेस नेतृत्व की तरफ से कोई भी निर्णय नहीं लिया गया है.

अभी स्थिति साफ नहीं है कि अशोक गहलोत मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे या फिर किसी दूसरे को बनाया जाएगा. मीडिया में यह भी चर्चा है कि अशोक गहलोत के ऊपर कार्यवाही नहीं हुई है इससे ऐसा लग रहा है कि वह अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ सकते हैं. ऐसी स्थिति में बदलाव हो सकता है राजस्थान के मुख्यमंत्री का.

सचिन के लिए कहां मुश्किल खड़ी हो रही है?

कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाना चाहता है लेकिन उसमें कई अड़चनें दिखाई दे रही है. गहलोत सचिन पायलट के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने के लिए तैयार नहीं है. वह बार-बार 2 साल पहले हुई एक बगावत की याद दिला रहे हैं. गहलोत समर्थक कह रहे हैं कि आलाकमान को यह ध्यान रखना चाहिए कि 2 साल पहले बीजेपी के साथ मिलकर सरकार गिराने की साजिश किन लोगों ने रची थी. आपको बता दें कि सियासत में कहा जाता है कि जो सियासत में दिखता है वह होता नहीं है और जो होता है वह दिखता नहीं है.

अशोक गहलोत के लिए भी आने वाले दिनों में मुश्किलें कम नहीं होने वाली है, क्योंकि पिछले कुछ घंटों में जो कुछ भी हुआ है उसमें बहुत कुछ बदला है और उससे आलाकमान के सामने अशोक गहलोत की छवि पर असर पड़ा है. गहलोत को लग रहा था कि उन्हें अध्यक्ष बनाने के लिए राहुल और सोनिया दोनों का समर्थन है. वह मुख्यमंत्री पद नहीं छोड़ना चाहते थे. वह राहुल गांधी से मिले भी थे और राहुल ने साफ तौर पर कहा था कि एक व्यक्ति एक पद वाला सिद्धांत रहेगा ही. इसके बाद देखने में आया कि उनके समर्थकों ने बागी रुख अपना लिया था. हालांकि अब समर्थक भी धीरे-धीरे यही कह रहे हैं कि आलाकमान जो निर्णय लेगा वह मानेंगे.

आपको बता दें कि राहुल गांधी इस वक्त भारत जोड़ो यात्रा पर हैं, लेकिन कांग्रेस के नेता कुर्सी के लिए लड़ रहे हैं. कांग्रेस के साथ ऐसा पहली बार नहीं है इससे पहले भी कांग्रेस के नेताओं ने पार्टी के अंदर ही बगावत करके पार्टी की किरकिरी कराई है. कांग्रेस लंबे वक्त तक देश में एक छत्र शासन करती रही. साथ ही देश के कई राज्यों में भी उसने अपने दम पर सरकार चलाई. लेकिन गठबंधन की राजनीति के दौर में कांग्रेस कमजोर होना शुरू हुई. 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में करारी हार के साथ ही पार्टी को कई राज्यों में चुनावी शिकस्त का सामना करना पड़ा.

बड़ी संख्या में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने साथ छोड़ा लेकिन कांग्रेस के नेता अभी भी कांग्रेस को मजबूत करने की जगह कमजोर करने में लगे हैं. गहलोत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता है उनके ऊपर यह जिम्मेदारी थी कि वह कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव मैदान में उतरने के साथ ही सभी राज्यों की कांग्रेस इकाइयों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को एकजुट करके मोदी सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़े. लेकिन राजस्थान में हुए सियासी संग्राम ने बता दिया कि गहलोत राजस्थान नहीं छोड़ना चाहते हैं.

छोड़ने की सूरत में अपने किसी करीबी नेता को ही मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाना चाहते हैं. निश्चित रूप से कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व को उनसे यह उम्मीद नहीं रही होगी. आने वाले दिनों में कांग्रेस का नेतृत्व कैसे फैसले लेता है यह दिलचस्प होगा. अशोक गहलोत के लिए भरोसा कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व में जरूर कम हुआ है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अशोक गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ते हैं या नहीं और लड़ते हैं तो उन्हें कार्यकर्ताओं का और केंद्रीय नेतृत्व का कितना समर्थन मिलता है.

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