Gehlot Sachin Rahul

अध्यक्ष पद को लेकर लगाए जा रहे तमाम कयासों के बीच राहुल गांधी ने आज एक बड़ा बयान दिया है. कांग्रेस नेता ने कहा, जो भी कांग्रेस अध्यक्ष बने, उसे याद रखना होगा की वो एक विचारों के समूह, विश्वास भारत के विजन का प्रतिनिधित्व करता है. उन्होंने कहा है कि, उदयपुर में जो संकल्प लिया उसका पालन होना चाहिए. राहुल गांधी की बातों का मतलब साफ है. एक व्यक्ति एक पद का पालन होगा. इससे साफ हो चुका है कि अशोक गहलोत अगर अध्यक्ष बन जाते हैं तो राजस्थान के सीएम की कुर्सी को अलविदा कहना पड़ेगा. इसके अलावा राहुल गांधी ने कहा है कि, कांग्रेस कार्यकर्ता मेरा परिवार हैं, उनके साथ मेरा डायरेक्ट कनेक्शन है. वो जब कुछ पूछते हैं तो मैं उनको डायरेक्ट बता देता हूं. मीडिया के जरिए बताने की जरूरत नहीं है.

इस बीच राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री पद छोड़ने का संकेत दिया है. राहुल गांधी के नहीं मानने पर कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर नामांकन करने के साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़ने के भी संकेत दिए हैं. उन्होंने कहा है कि अध्यक्ष का पद एक व्यक्ति एक पद के दायरे में नहीं आता, लेकिन इतिहास में कोई कांग्रेस अध्यक्ष मुख्यमंत्री नहीं रहा इसलिए फैसला करना पड़ेगा. अशोक गहलोत बुधवार शाम 4 बजे सोनिया गांधी से मिले थे. करीब 2 घंटे की मुलाकात के बाद गहलोत मुलाकात को लेकर कुछ नहीं बोले थे.

आपको बता दें कि 1 नेशनल टीवी चैनल के साथ बातचीत में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पद छोड़ने के संकेत दिए हैं. उन्होंने कहा है कि राहुल गांधी नहीं माने तो फार्म भरना होगा. मेरे बारे में भावना बनाई गई है इसलिए उसका सम्मान करते हुए मैं नामांकन करूंगा. सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि जो हालात राजस्थान के अंदर है हाईकमान उसकी स्टडी करेगा और देखेगा की विधायकों की क्या भावना है. यह ध्यान रखना होगा कि हम अगला चुनाव जीते. क्योंकि अब कांग्रेस के पास बड़ा राज्य राजस्थान ही है.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि हमारे लिए यह फैसला बहुत नाजुक फैसला भी होगा और बहुत सोच समझ कर लेना पड़ेगा. सचिन पायलट के नाम पर एतराज होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि मैं किसी के नाम की चर्चा नहीं करता हूं और ना ही कर रहा हूं. हमें यह देखना है कि कौन आए जिससे मैसेज जाए कि पार्टी एकजुट है और हम किसी भी कीमत पर सरकार रिपीट करें. इससे अन्य राज्यों में भी पार्टी का रिवाइवल हो यह बहुत बड़ा फैसला होगा और यह सोच समझ कर लेना पड़ेगा.

उन्होंने कहा कि आज तक इतिहास में कोई कांग्रेस अध्यक्ष साथ में मुख्यमंत्री नहीं रहा है. इसलिए स्वाभाविक है कि जो प्रश्न उठते हैं उसी आधार पर हम लोग भी फैसला करेंगे. गहलोत ने कहा कि मुख्य विपक्ष की भूमिका में कांग्रेस को रिवाइल करने का काम करना है फिर आप 2 पद कैसे रख सकते हैं. अब सवाल आता है कि एक व्यक्ति एक पद लागू नहीं होता, फिर भी अध्यक्ष बनने वाले को सोचना होगा कि वह 2 पद कैसे रखेगा. वह अध्यक्ष पद को जस्टिफाई नहीं कर पाएगा.

आपको बता दें कि कांग्रेस में राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव राजस्थान में सबसे बड़ा मुद्दा इस वक्त बना हुआ है. इसको लेकर तरह-तरह के कयास भी लगाए जा रहे हैं. कांग्रेस शासित सबसे बड़ा और अहम राज्य होने के चलते राजस्थान पार्टी के लिए महत्वपूर्ण है. खबरें तो यह भी है कि गहलोत के अध्यक्ष बनने के बाद आलाकमान सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बना सकता है. ऐसी स्थिति में राजस्थान में सचिन पायलट की स्वीकार्यता और सरकार चलाने पर नजर होगी. जनता में तो वह काफी लोकप्रिय हैं मगर विधायकों में उनकी स्वीकार्यता भी देखी जाएगी.

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