सत्ता की हनक में जनमत से दूर होते मोदी!

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Narendra-modi

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुनावी जीत लगातार जारी है. लेकिन प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा की यह चुनावी जीत PM मोदी की लोकप्रियता का पैमाना नहीं रह गई है. लगातार जनविरोधी फैसले लेने के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी तो चुनाव जीत रहे हैं, लेकिन उनकी लोकप्रियता सिर्फ और सिर्फ मडिया तक सीमित है, जमीन पर धराशाई है.

महीनों तक कश्मीर को कैद बना कर रखना हो या फिर ट्रिपल तलाक का मसला हो या फिर संख्या बल के दम पर किसानों की मांगों को पैरों तले रौंदते हुए किसानों की मांगों के विपरीत जाकर तीन कृषि कानून जबरदस्ती थोपने का फैसला हो, PM मोदी के नेतृत्व में BJP ने जनमत के खिलाफ लगातार फैसले लिए हैं, लेकिन चुनावी जीत जारी है.

जनमत के विरुद्ध फैसले लेकर भी BJP चुनाव जीत रही है उसके अनेक कारणों में एक कारण मीडिया मैनेजमेंट भी है. मौजूदा भारतीय मीडिया भाजपा की और PM मोदी की प्रचार एजेंसी बनकर सत्ता के सामने घुटने टेक चुकी है. मौजूदा भारतीय मीडिया से जनता की, विपक्ष की, देश के युवाओं की, गरीबों की, किसानों की आवाज गायब है. भाजपा के सामने नतमस्तक मीडिया उसी आवाज को जगह देती है, जिस आवाज में मौजूदा सत्ता की तारीफ, PM मोदी की तारीफ हो.

पिछले दिनों अलग-अलग चैनलों पर देश के अलग-अलग किसानों का इंटरव्यू दिखाया गया, जिसमें वह तथाकथित किसान कहते हुए पाए गए कि सरकार द्वारा लाए गए कृषि बिलों से वह खुश है. क्या देश की मीडिया को हरियाणा पंजाब के किसानों और देश के दूसरे राज्यों के किसानों में फर्क नहीं पता? क्या देश की मीडिया को हरियाणा पंजाब और बिहार के किसानों में फर्क नहीं पता?

जिनके पास थोड़ा बहुत खेत है या जो दूसरों के खेतों में मजदूरी करते हैं, ऐसे व्यक्तियों को किसान बताकर, उनका इंटरव्यू दिखाकर भारतीय मीडिया क्या साबित करना चाहती है? दूसरों के खेतों में काम करने वाले मजदूरों को या फिर जिनके पास या मामूली खेत है ऐसे लोगों का इंटरव्यू दिखाकर हरियाणा पंजाब के बड़े किसानों की आवाज मीडिया क्यों दबाना चाहती है? देश की 70% आबादी PM मोदी की नीतियों के खिलाफ है, PM मोदी की सरकार के खिलाफ है और PM मोदी की प्रचार एजेंसी यानी भारतीय मीडिया के भी खिलाफ है. तो फिर सवाल यह उठता है कि देश की इतनी बड़ी आबादी के विरोध के बावजूद BJP चुनाव जीत कैसे रही है?

कई लोग आरोप लगाते हैं कि चुनावी धांधली करके, ईवीएम में हेरफेर करके भाजपा जीत रही है. लेकिन मैं ऐसा नहीं मानता. थोड़ी बहुत धांधली होती होगी लेकिन भाजपा की इतने बड़े पैमाने पर लगातार जीत धांधली के दम पर नहीं, बल्कि जनता के ही सपोर्ट और विरोध से हो रही है. भाजपा का वोट बैंक PM मोदी के और भाजपा के साथ मजबूती से खड़ा है. उनके हर फैसलों के साथ खड़ा है और चुनाव के समय वह बढ़-चढ़कर भाजपा के सपोर्ट में वोट भी कर रहा है. लेकिन जो देश की 70% आबादी PM मोदी की नीतियों के खिलाफ है वह किसके साथ है? इस सवाल के जवाब में ही PM मोदी की जीत छुपी हुई है.

देश की 70% आबादी जो भाजपा के और PM मोदी के विरोध में है, वह बिखरी हुई है. कहीं अरविंद केजरीवाल को वोट देती है, तो कहीं कांग्रेस को. कहीं मायावती को वोट देती है तो कहीं अखिलेश यादव को. 70% की बड़ी आबादी में सेंध लगाने के लिए भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर रावण भी है और मुस्लिम आबादी में सेंध लगाने के लिए असदुद्दीन ओवैसी भी है. PM मोदी के नेतृत्व में लोकसभा में BJP ने प्रचंड जीत दर्ज की थी, जनमत खिलाफ होने के बावजूद. इसका सबसे बड़ा कारण था कि दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश तक और बंगाल तक बिहार तक 70% आबादी के वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए कांग्रेस ने भी दम लगाया, अरविंद केजरीवाल ने भी दम लगाया, अखिलेश यादव ने भी दम लगाया, मायावती ने भी दम लगाया, ममता बनर्जी ने भी दम लगाया और अनेक छोटे-बड़े क्षेत्रीय दलों ने भीदम लगाया.

इसी तरीके से विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिल रहा है. जनमत खिलाफ होने के बावजूद भी PM मोदी और उनकी पार्टी की प्रचंड जीत की नीव भाजपा की प्रचार एजेंसी मीडिया के साथ-साथ क्षेत्रीय दल और जाति धर्म के आधार पर पैदा हुए ओवैसी जैसे नेता भी रख रहे हैं. आज किसान सड़कों पर है. कड़कड़ाती ठंड में सड़कों पर रातें बिताने के लिए अगर किसान मजबूर है तो उसके लिए सिर्फ PM मोदी और उनकी पार्टी जिम्मेदार नहीं है, विधानसभा और लोकसभा चुनाव के समय भाजपा के विरोध में खड़ी आबादी के वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए जो तमाम छोटी-बड़ी पार्टियां और उनके जाति धर्म के आधार पर पैदा हुए नेता भी हैं.

जब तक देश की 70% आबादी जाति धर्म के नाम पर बिखरी हुई रहेगी, जाति धर्म के नाम पर नेता पैदा करती रहेगी, कभी कांग्रेस को कभी आम आदमी पार्टी को कभी ममता बनर्जी की पार्टी को कभी अखिलेश यादव की पार्टी को कभी चंद्रशेखर रावण को कभी मायावती को अपना वोट बांटती रहेगी, तब तक भाजपा बहुमत कम होने के बावजूद यूं ही देश पर राज करती रहेगी और जनविरोधी नीतियां लाती रहेगी, देश यूं ही बेचती रहेगी.

आज सरकारी कंपनियां कॉरपोरेट के हाथों में जा रही हैं. भारतीय रेलवे जो देश के लोगों को सबसे ज्यादा रोजगार देती थी वह कॉरपोरेट के हाथों में लगभग जा चुकी है. देश के अधिकतर एयरपोर्ट कॉरपोरेट के हाथों में जा चुके हैं. देश की अधिकतर सरकारी संपत्ति कॉरपोरेट्स हाथों में जा चुकी है. क्या इसके जिम्मेदार सिर्फ PM मोदी है ? नहीं बिल्कुल नहीं! इसके जिम्मेदार वह सभी लोग हैं जो देश की 70% आबादी को टुकड़ों में बांट रहे हैं और कहीं ना कहीं अंदरूनी तौर पर मोदी को मजबूत कर रहे हैं.

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