पंजाब में भी हुई किसान महापंचायत में बड़ा ऐलान

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केंद्र सरकार के कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ देश भर में किसान महापंचायतें जारी हैं. पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर हरियाणा, राजस्थान और उत्तरांखड में हुई महापंचायतों के बाद गुरुवार को लुधियाना के जगराओं में महापंचायत बुलाई गई. इसमें बड़ी संख्या में किसानों के साथ ही आम लोग जुटे और कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ लड़ाई जारी रखने का एलान किया.

संयुक्त किसान मोर्चे की ओर से बुलाई गई यह महापंचायत जगराओं की अनाज मंडी में हुई. इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं, किसान और मजदूर भी शामिल हुए. लुधियाना जिले की कई जगहों के अलावा मोगा और बरनाला से भी लोग महापंचायत में पहुंचे. किसानों के अलावा आढ़तियों की संस्थाओं, व्यापारी संगठनों से जुड़े लोगों ने भी इसमें भाग लिया.

सिंघु बॉर्डर पर चल रहे धरने में पंजाब के लोगों की बड़ी भागीदारी है. अब तक धरने को ढाई महीने का वक़्त हो चुका है और सरकार के साथ कई दौर की वार्ताएं भी फ़ेल हो चुकी हैं, ऐसे में सवाल यही उठता है कि कैसे किसानों और सरकार के बीच बातचीत शुरू होगी और इस मसले का हल निकलेगा.

महापंचायत में किसान नेताओं ने कहा कि दिल्ली के बॉर्डर्स पर चल रहे किसान आंदोलन में 250 किसान अब तक शहीद हो चुके हैं. सरकार यह प्रचार कर रही है कि किसान गेहूं की फसल बोने वापस पंजाब चले जाएंगे लेकिन हमें दिल्ली में चल रहे धरने को और मजबूत करना है. किसान नेताओं ने कहा कि संवैधानिक नियमों के मुताबिक़ केंद्र सरकार को खेती पर क़ानून बनाने का अधिकार नहीं है और सरकार ने राज्यसभा में फर्जी वोटिंग करके कृषि क़ानूनों को पास करवा दिया.

उन्होंने कहा कि कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ लड़ाई लंबी है, इसलिए पंजाब के लोगों को इसके लिए तैयार रहना होगा. किसान नेता बलवीर सिंह राजेवाल ने कहा कि सरकार इस आंदोलन को एक राज्य का बता रही है लेकिन आंदोलन कई और राज्यों में भी फैल रहा है. इस किसान महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल), भारतीय किसान यूनियन (उगराहां), भारतीय किसान यूनियन (सिद्धूपुर), भारतीय किसान यूनियन (दकौंदा) सहित कई किसान संगठनों और उनके नेताओं ने भाग लिया. सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन की अगुवाई कर रहे कई किसान नेता भी इस महापंचायत में पहुंचे.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सक्रियता ज़्यादा

किसान नेता राकेश टिकैत के भावुक होने के बाद से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शुरू हुई किसान महापंचायतों में बड़ी संख्या में लोग उमड़ रहे हैं. मुज़फ्फरनगर के बाद बाग़पत, मथुरा, बिजनौर, शामली और अमरोहा में महापंचायत हो चुकी हैं शामली में तो प्रशासन की ना के बाद भी महापंचायत हुई और बड़ी संख्या में लोग पहुंचे. इसके अलावा हरियाणा के जींद और राजस्थान के दौसा और मेहंदीपुर बालाजी में भी किसान महापंचायतों का आयोजन किया जा चुका है. लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों और राजनीतिक दलों की सक्रियता ज्यादा है.

कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ दिल्ली के बॉर्डर्स पर आंदोलन कर रहे किसानों ने एलान किया है कि वे 18 फरवरी को 4 घंटे तक देश भर में रेल रोकेंगे. इसका वक़्त दिन में 12 से 4 बजे तक निर्धारित किया गया है. किसान आंदोलन की अगुवाई कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि 12 फरवरी को राजस्थान में सभी टोल को फ्री कर दिया जाएगा. इससे पहले हरियाणा और पंजाब में किसान कई बार टोल को फ्री कर चुके हैं.

चक्का जाम वाले दिन पंजाब और हरियाणा में कई जगहों पर प्रदर्शनकारी सड़क पर उतरे थे और यहां जाम का ख़ासा असर देखने को मिला था. इसके अलावा महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान में भी किसानों ने प्रदर्शन किया था. संयुक्त किसान मोर्चा ने एलान किया है कि 14 फरवरी को पुलवामा में शहीद हुए जवानों की याद में देश भर में कैंडल लाइट और टॉर्च जलाकर मार्च निकाला जाएगा.

किसानों के आंदोलन का लगातार विस्तार होते देख विपक्षी सियासी दल भी आंदोलन के समर्थन में आगे आ चुके हैं. कांग्रेस के अलावा आम आदमी पार्टी, एनसीपी, राष्ट्रीय लोकदल, शिव सेना, इंडियन नेशनल लोकदल, शिरोमणि अकाली दल, समाजवादी पार्टी सहित कई दलों के नेताओं ने किसान आंदोलन को समर्थन दिया है.

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