किसानों पर एक और मार

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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव और दिल्ली की सीमा पर किसानों के प्रदर्शन के बीच देश के सबसे बड़े उर्वरक विक्रेता इफको (IFFCO) ने खाद की कीमतों में भारी वृद्धि की है.

यूरिया के बाद भारत में सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली खाद अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) के 50 किलो के बैग की कीमत 1,900 रुपये प्रति बैग कर दी गई है. जो कि मौजूदा कीमत की तुलना में 58 प्रतिशत ज्यादा है. इफको ने कई उर्वरकों की कीमतों में भी काफी वृद्धि की है.

मसलन एक उर्वरक की कीमत जो पहले 1,175 रुपये थी बढ़ाकर 1,775 प्रति बैग कर दी गई है. इसी तरह 1,185 रुपए में मिलने वाले बैग की कीमत 1,800 रुपए प्रति बैग कर दी गई है. जो बैग पहले 925 रुपए में मिलता था वह अब 1,350 रुपए में मिलेगा.

नई कीमतें 1 अप्रैल से लागू होंगी. इफको के प्रवक्ता ने कहा कि गैर-यूरिया उर्वरकों की कीमतें पहले से ही अनियंत्रित हैं. इफको ने ये कदम दूसरी उर्वरक कंपनियों द्वारा कीमतों में बढ़ोतरी के बाद उठाया है. इसका किसी भी राजनीतिक दल या सरकार से कोई संबंध नहीं है.

भारत में आयात किए जाने वाले डीएपी की कीमतें अब लगभग $ 540 प्रति टन है, जबकि अक्टूबर में ये 400 डॉलर से कम थी. इसी तरह, अमोनिया और सल्फर की कीमतें भी क्रमशः $ 280 और $ 85 प्रति टन से बढ़कर $ 500 और $ 220 प्रति टन हो गई हैं.

इस दौरान यूरिया और पोटाश के म्यूरिएट की कीमत क्रमशः $ 275 और $ 230 से $ 380 और $ 280 प्रति टन हो गई हैं. खाद की कीमत में बढ़ोतरी कृषि जिंसों में नए बुल साइकल के चलते हुई है. गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन ने अपना खाद्य मूल्य सूचकांक (FPI) नंबर जारी किया.

इस साल मार्च में यह 118.5 पॉइंट रहा जबकि जून 2014 में यह 119.3 पॉइंट था. दिलचस्प बात यह है कि एफपीआई मई 2020 में वैश्विक महामारी कोरोना और लॉकडाउन के चलते 91 पॉइंट पर पहुंच गया था. गौरतलब है कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के बाद खाद की कीमत में बढ़ोतरी के राजनीतिक और आर्थिक दोनों नतीजे हो सकते हैं.

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