Rubika Liyaquat Ashok Kumar Pandey

कांग्रेस के नेता सलमान खुर्शीद (salman khurshid) द्वारा लिखी गई किताब पर सियासी उबाल जारी है. उन्होंने अपनी किताब में बोको हराम और आईएसआईएस से हिंदुत्व की तुलना की है. बीजेपी तिमिलाई हुई है.

बीजेपी समर्थित मीडिया और पत्रकार जनता के जरूरी मुद्दों को छोड़कर कांग्रेस के नेता सलमान खुर्शीद की किताब को लेकर डिबेट करा रहे हैं और अपना ओपिनियन दे रहे हैं. ताकि जनता के मुद्दों को दबाकर हिंदू-मुस्लिम के सहारे आने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी की वैतरणी पार कराई जा सके. सलमान खुर्शीद के हिंदुत्व को लेकर लिखे गए वक्तव्य पर बीजेपी के नेता भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं. मीडिया में लगातार डिबेट हो रही है.

सलमान खुर्शीद ने जो लिखा है उसको लेकर बीजेपी तथा बीजेपी समर्थक मीडिया की तरफ से कहा जा रहा है कि यह हिंदुओं का अपमान है, हिंदुओं की तुलना सलमान खुर्शीद ने बोको हराम और आईएसआईएस से की है. जबकि सच्चाई यह है कि हिंदुत्व और सनातन धर्म में काफी फर्क है. जिस हिंदुत्व की बात बीजेपी तथा उससे जुड़े हुए संगठन करते हैं वह हिंदुत्व एक राजनीतिक विचारधारा है और यह बात किसी से छुपी हुई नहीं है कि यह विचारधारा इस समय धर्म के आधार पर देश को बांटने में लगी हुई है. “जय श्रीराम” के नारे लगाकर लोगों को परेशान करने में लगी हुई है इस विचारधारा से भरी भीड़.

हिंदुत्व की राजनीतिक विचारधारा का इस्तेमाल पिछले कुछ सालों से उग्र राजनीति करने के लिए सत्ताधारी पार्टी और उसके संगठनों द्वारा किया जा रहा है. ताकि इसका राजनीतिक लाभ लिया जा सके. सलमान खुर्शीद ने जो अपनी किताब में लिखा है वह इसी राजनीतिक विचारधारा को लेकर लिखा है. लेकिन मुद्दे को डायवर्ट कर के, बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश किया जा रहा है बीजेपी की तरफ से भी और बीजेपी समर्थक पत्रकारों की तरफ से भी. रुबिका लियाकत (Rubika liyaquat) ने भी सलमान खुर्शीद की लिखी किताब को लेकर डिबेट की थी और ट्विटर पर पोस्ट भी की थी.

इसी को लेकर उन्हें वरिष्ठ इतिहासकार अशोक कुमार पांडेय (Ashok Kumar Pandey) ने जवाब देते हुए लिखा है कि, सुश्री रुबिका लियाकत हिंदुत्व के सिद्धांत के तहत सावरकर सिस्टर निवेदिता को भी भारतीय नहीं मानते थे क्योंकि उनके लिए भारतीय का मतलब हिंदू होना था. पुण्यभूमि तो आपकी भी भारत के बाहर है तो न आप उस हिसाब से हिंदू हुईं न भारतीय. पढ़ लीजिए, एलर्जी आपको भी हो जाएगी.

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव बस कुछ ही महीनों बाद होने वाले हैं. उससे पहले चुनावी लाभ लेने के लिए बीजेपी और उसका प्रचार करने वाली मीडिया की तरफ से हिंदू-मुस्लिम कार्ड लगातार खेला जा रहा है. ताकि जनता अपने मुद्दों को भूलकर जाति धर्म में बंटकर एक बार फिर से बीजेपी को वोट दें.

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