बाइडन के शपथ लेते ही हरकत में आया चीन

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अमेरिका के राष्ट्रपति के तौर पर डोनाल्ड ट्रंप का कार्यकाल समाप्त होने के ठीक बाद चीन ने बुधवार को ट्रंप प्रशासन के 30 पूर्व अधिकारियों के खिलाफ पाबंदी लगा दी. राष्ट्रपति जो बाइडन के शपथ लेने के कुछ देर बाद चीन ने ट्रंप प्रशासन में विदेश मंत्री रहे माइक पोम्पिओ, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओ ब्रायन और संयुक्त राष्ट्र में राजदूत केली क्राफ्ट पर यात्रा और कारोबारी लेन-देन पर पाबंदी लगा दी.

ट्रंप प्रशासन में आर्थिक सलाहकार रहे पीटर नवारू, एशिया के लिए शीर्ष राजनयिक डेविड स्टिलवेल, स्वास्थ्य और मानव सेवा मंत्री एलेक्स अजर के साथ पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन और रणनीतिकार स्टीफन बैनन पर भी पाबंदी लगायी गयी है. ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों पर लगायी गयी ये पाबंदी प्रतीकात्मक हैं लेकिन अमेरिका के प्रति यह चीन के कड़े रुख को जाहिर करता है.

आपको बता दे कि जो बाइडन अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति बन गए, जिसके साथ ही उस देश में एक नए युग की शुरुआत हो गई. बुधवार को वाशिंगटन स्थित कैपिटल हिल पर हुए एक भव्य समारोह में बाइडन ने पद और गोपनीयता की शपथ ली.. उनके साथ ही भारतीय मूल की कमला हैरिस ने उप राष्ट्रपति पद की शपथ ली. वे इस पद पर पहुँचने वाली पहली महिला तो हैं ही, पहली अश्वेत और पहली भारतीय मूल की अमेरिकी नागरिक हैं.

अमेरिका के इतिहास में सबसे अधिक उम्र में राष्ट्रपति बनने वाले बाइडन ने शपथ ग्रहण के तुरंत बाद राष्ट्रपति के तौर पर देश को संबोधित किया. जो बाइडन ने अपने पहले भाषण में एकता पर ज़ोर देते हुए कहा कि देश में एकजुटता की ज़रूरत है. उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन को उद्धृत करते हुए कहा कि हमें एकता की सबसे अधिक ज़रूरत है. उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि हम पूरे देश को एकजुट करें और सही अर्थों में इसे संयुक्त राज्य अमेरिका बनाएं.

उन्होंने कहा कि इसी जगह एक समय अश्वेतों को मतदान के अधिकार के लिए संघर्ष करना पड़ा था और आज समय है कि हमारे बीच अश्वेत महिला कमला हैरिस ने थोड़ी देर पहले ही उप राष्ट्रपति पद की शपथ ली है. बाइडन ने कहा, लोकतंत्र में अलग-अलग मत होते हैं, अमेरिका में भी हैं. लेकिन अमेरिका की यह खूबी है कि विचारों के अंतर से फूट नहीं पड़ती है, एक-दूसरे के ख़िलाफ नहीं हो जाते हैं. हम सब अलग-अलग विचारों के साथ मिल कर एक साथ रहते हैं.

उन्होंने कहा, आज हम एक उम्मीदवार की नहीं बल्कि लोकतंत्र की जीत का जश्न मना रहे हैं. लोगों को सुना गया है. हमने फिर से सीखा है कि लोकतंत्र अनमोल है, लोकतंत्र प्रबल है. जो बाइडेन ने कहा कि देश को विभाजित करने वाली ताकतें गहरी हैं और वे वास्तविक हैं, लेकिन कि वो नई नहीं हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिका का इतिहास निरंतर संघर्ष का रहा है.

सबसे अधिक उम्र में राष्ट्रपति बनने वाले बाइडन जब 29 साल की उम्र में पहली बार निर्वाचित होकर अमेरिकी सीनेट पहुँचे तो वे सबसे युवा प्रतिनिधियों में से एक थे. बाइडन ने 1988 और 2008 में भी अपनी पार्टी से राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनने के लिए दावेदारी की थी, लेकिन असफल रहे थे. साल 1972 में हुई कार दुर्घटना में उनकी पहली पत्नी नीलिया और उनकी 13 महीने की बेटी नाओमी की मौत हो गई थी तथा उनके बेटे ब्यू और हंटर गंभीर रूप से घायल हो गए थे.

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