राजदीप पर नहीं अवमानना केस, SC ने दी सफाई-साइट पर थी गलत जानकारी

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पत्रकार राजदीप सरदेसाई के ख़िलाफ़ न्यायपालिका से संबंधित उनके ट्वीट के लिए मुक़दमा किए जाने की ख़बरों को सुप्रीम कोर्ट के सूत्रों ने खारिज किया है और कहा है कि राजदीप के ख़िलाफ़ कोई अवमानना का केस दर्ज नहीं किया गया है.

इस मामले में पहले ख़बर आई थी कि आस्था खुराना नाम की याचिकाकर्ता की शिकायत पर अवमानना का केस दर्ज किया गया है. लेकिन इन ख़बरों को खारिज किया गया है. क़ानूनी मामलों पर रिपोर्टिंग करने वाली वेबसाइट ‘लाइव लॉ’ ने ट्वीट किया है.

इस ट्वीट में साफ़ किया गया है, सुप्रीम कोर्ट के सूत्र सफ़ाई देते हैं कि राजदीप सरदेसाई के ख़िलाफ़ स्वत: संज्ञान में आपराधिक अवमानना ​​की कार्रवाई शुरू नहीं की गई है और सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर एसएमसी (Crl) 2/2021 के रूप में दिखाए गए मामले की स्थिति “अनजाने में” हो गई है. उसको ठीक करने के लिए उचित कार्रवाई प्रक्रियाधीन है.

क्या था मामला?

बार एंड बेंच की रिपोर्ट कहती है कि 14 अगस्त को जब प्रशांत भूषण को अवमानना का दोषी करार दिया गया था तो राजदीप सरदेसाई ने एक ट्वीट किया था. इस ट्वीट के अलावा सरदेसाई के और कई ट्वीट्स को आस्था खुराना ने अपनी याचिका का हिस्सा बनाया है. राजदीप ने इस ट्वीट में लिखा था, प्रशांत भूषण को सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना का दोषी ठहराया. ये तब है जब कश्मीर में हिरासत में रखे गए लोगों की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाएं एक साल से ज्यादा समय से लंबित हैं.

बाद में जब भूषण पर कोर्ट ने 1 रुपये का जुर्माना लगाया था, तब भी राजदीप ने एक ट्वीट किया था. बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें कहा गया कि ‘कोर्ट खुद के बनाए शर्मनाक हालात से बाहर आने की कोशिश करता हुआ. खुराना ने सरदेसाई के उन पुराने ट्वीट्स को भी अपनी याचिका में डाला, जिसमें उन्होंने प्रशांत भूषण का केस सुनने वाले जस्टिस अरुण मिश्रा और पूर्व CJI रंजन गोगोई पर कथित आक्षेप लगाते हैं.

अटॉर्नी जनरल ने नहीं दी सहमति

कोर्ट की अवमानना कानून का सेक्शन 15 और सुप्रीम कोर्ट में अवमानना की कार्रवाई से संबंधित रूल 3 के मुताबिक, किसी निजी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक अवमानना की याचिका पर सुनवाई से पहले अटॉर्नी जनरल या सॉलिसिटर जनरल की सहमति जरूरी है. इसी वजह से आस्था खुराना ने केके वेणुगोपाल से सहमति मांगी थी, जो उन्होंने नहीं दी. आस्था ने अपनी शिकायत में सरदेसाई के ट्वीट्स को ‘सस्ता पब्लिसिटी स्टंट’ बताया था. अटॉर्नी जनरल से सहमति नहीं मिलने के बावजूद खुराना ने अपनी याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर दी थी.

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