किसान आन्दोलन पर राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने बढ़ाई भाजपा की मुश्किलें

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satya pal malik

मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने किसान आंदोलन को लेकर सरकार और किसानों से मिलकर समाधान निकालने की अपील की है. इसके साथ ही उन्होंने सरकार से अपील करते हुए कहा कि दुनिया के किसी भी आंदोलन को दबाकर या कुचलकर शांत नहीं किया जा सकता है.

दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन को 2 महीने से ज्यादा वक्त बीत चुका है. गवर्नर मलिक के इस बयान से बीजेपी और केंद्र सरकार असहज हो सकती है. मलिक ने कहा, मैं खुद किसानों के आंदोलन से निकला हुआ नेता हूं. इसलिए मैं उनकी समस्याओं को समझ सकता हूं. इस मसले का जल्द से जल्द समाधान निकालना ही देश के हित में है. मैं सरकार से अपील करता हूं कि किसानों की समस्या को सुनें. दोनों पक्षों को जिम्मेदारी के साथ बातचीत में शामिल होना चाहिए.

उन्होंने कहा, अधिकतर किसान शांतिपूर्वक ही रहे. मैं उनसे सरकार के साथ बातचीत करने और समाधान निकालने की अपील करता हूं. इसके साथ ही मैं सावधान करते हुए यह बताना चाहता हूं कि दुनिया के किसी भी आंदोलन को दबाकर और कुचलकर शांत नहीं किया जा सकता है. मूलरूप से उत्तर प्रदेश के बागपत के निवासी सत्यपाल मलिक अभी मेघालय के राज्यपाल हैं.

इससे पहले वह जम्मू-कश्मीर, गोवा, बिहार, ओडिशा के भी राज्यपाल का पदभार संभाल चुके हैं. विधायक के तौर पर राजनीतिक जीवन शुरू करे वाले मलिक लोकसभा और राज्यसभा के सांसद भी रहे हैं. वह जनता दल और बीजेपी के साथ राजनीति में सक्रिय रहे.

इससे पहले शनिवार को बजट को लेकर हुई सर्वदलीय बैठक में पीएम मोदी ने कहा कि किसानों का मसला बातचीत से ही दूर होगा. उन्होंने कहा कि किसानों को दिया गया सरकार का प्रस्ताव आज भी कायम है. किसान नेताओं संग पिछली चर्चा में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने कहा था कि वे किसानों से केवल एक फोन दूर हैं. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुए इस बैठक में पीएम मोदी ने कहा कि सरकार विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों के मसलों को वार्ता के जरिए सुलझाने की लगातार कोशिश कर रही है.

पीएम नरेंद्र मोदी की इस प्रतिक्रिया के बाद किसान नेता नरेश टिकैत ने रविवार को कहा, प्रदर्शनकारी किसान प्रधानमंत्री की गरिमा का सम्मान करेंगे, लेकिन अपने स्वयं के सम्मान की रक्षा के लिए भी प्रतिबद्ध हैं. मसले का हल निकालने के लिए बीच का रास्ता निकाला जाना चाहिए, बातचीत की जानी चाहिए. बता दें कि दो महीने से भी ज्यादा समय से दिल्ली के सीमा क्षेत्रों में किसान तीन कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं.

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