क्या किसानों के नाम पर फिर किसानों को मूर्ख बना गई वित्त मंत्री?

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Budget 2021

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज देश का आम बजट पेश किया. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बड़ी-बड़ी घोषणाएं कर रही हैं और इन घोषणाओं को देखकर साफ झलक रहा है कि जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं, उन राज्यों की जनता को लुभाने की कोशिश हो रही है.

वित्त मंत्री ने आज बजट पेश किया उसमें कहा गया कि किसानों की आय दोगुनी की जाएगी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि उनकी सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने पर कायम है. अब सवाल यह उठता है कि अगर यह सरकार और वित्त मंत्री किसानों को लेकर इतनी ही चिंतित हैं, तो देश के तमाम किसान इस समय आंदोलन क्यों कर रहे हैं?

अगर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और मौजूदा मोदी सरकार सच में किसानों की आय दोगुनी करना चाहती है तो एमएसपी की लिखित गारंटी बिल के माध्यम से क्यों नहीं लाई थी? अगर यह सरकार सच में किसानों की आय दोगुनी करना चाहती है तो फिर किसानों की समस्याओं को सुनकर उनका हल क्यों नहीं निकाल रही है, किसानों पर दमनकारी नीति क्यों अपना रही है?

सवाल यह भी उठता है कि अगर यह सरकार सच में किसानों की आय दोगुनी करना चाहती है और किसानों को लेकर गंभीर है तो फिर प्रधानमंत्री मोदी खुद आगे आकर किसानों से फेस-टू-फेस संवाद क्यों नहीं करते? क्या चुनावी भाषणों की तरह बजट के माध्यम से भी जुमले देकर मीडिया के माध्यम से उसका प्रचार करा कर, देश के किसानों को गुमराह कर रही है यह सरकार? यह तो आने वाले कुछ सालों में समझ में आ जाएगा.

लेकिन बजट के माध्यम से जिस प्रकार सरकार का प्रचार प्रसार मीडिया पर हो रहा है, उससे साफ पता चलता है कि यह बजट कुछ अलग नहीं है. यह सरकार अभी तक जितने भी बजट पेश कर चुकी है उनमें जो घोषणाएं हुई थी उनमें कितनी पूरी हुई, कितनी अधूरी हैं इस पर मीडिया अभी तक चर्चा क्यों नहीं कर रही है? क्या बजट का मतलब यही होता है कि संसद के अंदर जुमले दे दो, उसका प्रचार करा दो, बाद में उन जुमलो का क्या हुआ इस पर कोई चर्चा नहीं, बाद में उन जुमलो को भूल जाओ?

बजट के माध्यम से फैसला लिया गया है कि एयरपोर्ट, सड़क, बिजली ट्रांसमिशन लाइन और वेयरहाउस बेच दिए जाएंगे. अब सवाल यह उठता है कि जब सब कुछ निजी हाथों को दे दिया जाएगा, सब कुछ बेच दिया जाएगा तो फिर यह सरकार खुद करेगी क्या? जब सब कुछ बेचा जा रहा है, सरकारी संपत्ति को निजी हाथों में दिया जा रहा है तो यह सरकार आखिर सत्ता पर बनी हुई क्यों है ?

भाजपा सरकार चुनाव के समय तो बड़ी बड़ी बातें करती है. 2014 चुनाव से पहले यही सरकार निजीकरण के खिलाफ थी, सरकारी संपत्ति को बेचने के खिलाफ थी, सरकारी संपत्ति को बेचने वालों को देशद्रोही गद्दार तक बताया करती थी फिर अचानक क्या हो गया?

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