राहुल के सवालों पर रक्षा मंत्रालय की सफ़ाई में कितना दम?

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Rajnath Singh

चीन के साथ सीमा विवाद को लेकर डिसइंगेजमेंट पर इतने सवाल खड़े हुए कि अब रक्षा मंत्रालय को फिर से सफ़ाई देनी पड़ी है. इसने कहा है कि समझौते में भारत ने कोई भी क्षेत्र नहीं खोया है. एक दिन पहले ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में इस पूरे मामले पर सफ़ाई दी थी, लेकिन देर शाम को कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर आठ सवाल पूछे.

इसके बाद शुक्रवार सुबह राहुल गांधी ने फिर से प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर सरकार से सवाल किए. रक्षा विशेषज्ञ भी इस मामले पर सरकार के फ़ैसले पर सवाल उठाते रहे हैं. इन सबका इतना दबाव पड़ा कि आज रक्षा मंत्रालय को 9 बिंदुओं में सफ़ाई जारी करनी पड़ी. रक्षा मंत्रालय ने जो सफ़ाई जारी की है उसमें मौटे तौर पर वही बातें हैं जो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में कही थीं.

रक्षा मंत्रालय ने जो बयान जारी किया है उसमें उसने इतना ज़रूर कहा है कि जो लोग सवाल उठा रहे हैं वे दरअसल भ्रामक जानकारियाँ फैला रहे हैं. पैंगोंग त्सो में वर्तमान में जारी डिसइंगेजमेंट के संबंध में कुछ ग़लत और भ्रामक टिप्पणियाँ मीडिया और सोशल मीडिया पर की जा रही हैं. रक्षा मंत्रालय ने दोहराया कि संसद के दोनों सदनों को अपने बयानों में रक्षा मंत्री द्वारा पहले ही स्पष्ट रूप से स्थिति साफ़ कर दी गई है.

हालाँकि, मीडिया और सोशल मीडिया में ग़लत तरीक़े से समझी जा रही जानकारी के कुछ मामलों को सीधे काउंटर करना ज़रूरी है. यह दावा कि भारतीय क्षेत्र फिंगर 4 तक है, स्पष्ट रूप से ग़लत है. भारत के क्षेत्र को भारत के नक्शे द्वारा दर्शाया गया है और इसमें 1962 से चीन के अवैध कब्जे में वर्तमान में 43,000 वर्ग किमी से अधिक शामिल हैं. यहाँ तक ​​कि भारतीय धारणा के अनुसार, वास्तविक नियंत्रण रेखा फिंगर 8 पर है, फिंगर 4 पर नहीं. यही कारण है कि भारत ने चीन के साथ वर्तमान हालात में भी फिंगर 8 तक गश्त का अधिकार बनाए रखा है.

पैंगोंग त्सो के उत्तरी तट पर दोनों पक्षों के स्थायी पोस्ट पहले से ही हैं. भारतीय पक्ष में, यह फिंगर 3 के पास धन सिंह थापा पोस्ट है और फिंगर 8 के पूर्व में चीनी है. वर्तमान समझौते में दोनों पक्षों द्वारा फॉरवार्ड की तैनाती को रोकने और इन स्थायी पोस्टों पर तैनाती जारी रखने का प्रावधान है. भारत ने इस समझौते के परिणामस्वरूप किसी भी क्षेत्र को नहीं खोया है. इसके विपरीत इसने यथास्थिति में किसी भी एकतरफ़ा बदलाव को रोका है.

रक्षा मंत्री के बयान ने यह भी साफ़ किया है कि हॉट स्प्रिंग्स, गोगरा और देपसांग सहित कई मुद्दों का समाधान किया जाना बाक़ी है. पैंगोंग त्सो के डिसइंगेजमेंट के पूरा होने के 48 घंटे के भीतर बकाया मुद्दों को उठाया जाना है. पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में हमारे राष्ट्रीय हित और क्षेत्र की प्रभावी सुरक्षा हो गई है क्योंकि सरकार ने सशस्त्र बलों की क्षमताओं पर पूरा विश्वास किया है. जो लोग हमारे सैन्य कर्मियों के बलिदान से संभव हुई उपलब्धियों पर संदेह करते हैं वे वास्तव में उनका अपमान कर रहे हैं. रक्षा मंत्रालय की सफ़ाई से पहले कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर सवाल उठाए थे.

राहुल ने कहा भारत माता का एक टुकड़ा चीन के पास है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह टुकड़ा चीन को पकड़ा दिया है.

राहुल ने क्या कहा और क्या हैं आरोप

मुझे भारत की सेना, एयर फ़ोर्स, नेवी और हिंदुस्तान की जनता पर भरोसा है. यह प्रधानमंत्री की ज़िम्मेदारी है कि वह हिंदुस्तान की सीमाओं की रक्षा करें लेकिन उन्होंने इसे नहीं निभाया. चीन की सेना देपसांग, गोगरा और हॉट स्प्रिंग से बाहर क्यों नहीं गई? हिंदुस्तान की पवित्र ज़मीन को मोदी ने चीन को दे दिया और उसके सामने अपना सिर झुका दिया. हमारी ज़मीन फ़िंगर 4 तक है और मोदी ने फ़िंगर 3 से फिंगर 4 तक की भारत की पवित्र ज़मीन चीन को पकड़ा दी है.

देपसांग में चीन अंदर आया है, गोगरा और हॉट स्प्रिंग की ज़मीन को लेकर राजनाथ सिंह ने कुछ नहीं बोला. राहुल ने कहा कि चीन के साथ जो हमारी बातचीत की पोजिशन थी- स्टेट्स क्वो एंटी 2020, उसे सरकार भूल गयी. कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रभारी रणदीप सुरेजवाला ने गुरुवार शाम को चीनी घुसपैठ के मुद्दे पर मोदी सरकार से 8 सवाल पूछे थे.

गुरुवार को क्या उठाए थे सवाल?

क्या प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री, भारत की भूभागीय अखंडता की सुरक्षा करने की ज़िम्मेदारी की संपूर्ण विफलता का कारण बताएंगे? मोदी सरकार केवल पैंगोंग त्सो लेक इलाके से ही ‘डिसइंगेज़मेंट’ का समझौता क्यों कर रही है और वो भी एलएसी की रूपरेखा बदलकर? रक्षामंत्री के बयान के मुताबिक़ भारतीय सेना अब फिंगर 3 तक सीमित हो जाएगी. क्या यह सीधे-सीधे भारत के हितों पर कुठाराघात करने का काम नहीं है? भारतीय सेना को ‘कैलाश रेंजेस’ पर अपनी प्रभावी व सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मौजूदगी से वापसी का समझौता क्यों?

चीन ने एलएसी के 18 किमी अंदर तक (वाई जंक्शन तक) घुसपैठ की हुई है और भारत की सेना को अपने ही पेट्रोलिंग प्वाइंट्स में पेट्रोलिंग करने से रोक रखा है. गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स में भी चीनी घुसपैठ बनी हुई है. क्या कारण है कि प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री, गोगरा-हॉट स्प्रिंग में चीनी घुसपैठ के बारे में रहस्यमयी चुप्पी साधे हैं? चीनी सेना चुमुर, दक्षिणी लद्दाख तक पेट्रोलिंग कर रही है.

क्या कारण है कि प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री इस मुद्दे को लेकर एक शब्द भी नहीं बोल रहे? क्या कारण है कि प्रधानमंत्री व रक्षा मंत्री सरकार के एक मंत्री द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ किए गए नाकाबिलेमाफी खिलवाड़ को लेकर मौन साधे हुए हैं? क्या वीके सिंह का बयान मोदी सरकार के इशारे पर दिया गया था? चीनी रक्षा मंत्रालय की ओर से पैंगोंग त्सो लेक के उत्तरी और दक्षिणी किनारों से अपने-अपने सैनिकों को वापस बुलाने के दावे किए जाने के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को संसद में बयान दिया.

राजनाथ सिंह ने क्या कहा था?

दोनों पक्ष अपनी-अपनी सेनाओं की गतिविधियों को स्थगित रखेंगे. पिछले साल के गतिरोध से पहले वाली स्थिति बहाल हो जाएगी. चीन के साथ कई दौर की वार्ता के बाद भारत ने कुछ नहीं खोया है. दोनों पक्ष सैनिकों को हटाने पर सहमत हैं. कई मुद्दों पर वार्ता बाक़ी है. पैंगोग लेक से सेना हटने के 48 घंटों के भीतर सीनियर कमांडर्स की बैठक. दोनों देश फ़ॉरवर्ड डिप्लायमेंट को हटाएँगे. अप्रैल, 2020 के बाद से पैंगोंग त्सो के नॉर्थ और साउथ ब्लॉक में निर्माण को हटाया जाएगा.

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