किसान आंदोलन- हरियाणा में टिकैत भरेंगे हुंकार, जींद में महापंचायत

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दो महीने से जारी किसान आंदोलन ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है. बुधवार को काफी हलचल वाला दिन रहने वाला है. भारतीय किसान यूनियन के राकेश टिकैत आज हरियाणा में होने वाली एक महापंचायत में हिस्सा लेंगे, तो वहीं गणतंत्र दिवस के दिन हुई हिंसा को लेकर सर्वोच्च अदालत में सुनवाई होनी है.

हरियाणा के जींद में आज महापंचायत होनी है, यहां कंडेला और खटकड़ के पास दो कार्यक्रम होने हैं. राकेश टिकैत इसमें हिस्सा लेंगे. यहां राज्य के अलग-अलग हिस्सों से किसान नेता आ रहे हैं. राकेश टिकैत की अपील के बाद से ही पश्चिमी यूपी, हरियाणा के किसान एकजुट हुए हैं. खासकर जाट समुदाय का खुलकर समर्थन मिल रहा है.

भारतीय किसान यूनियन के राकेश टिकैत बुधवार को कांडला खाप द्वारा बुलाई गई महापंचायत में हिस्सा लेंगे. गाजीपुर बॉर्डर में जारी प्रदर्शन को हरियाणा में खासा समर्थन मिल रहा है, यही कारण है कि राकेश टिकैत यहां भी पहुंच रहे हैं. किसानों के समर्थन में बीते दिनों में पश्चिमी यूपी और हरियाणा में कई महापंचायतें हो चुकी हैं.

कृषि कानून के खिलाफ दिल्ली के बॉर्डर्स पर किसानों का आंदोलन जारी है. किसान आंदोलन को अब तक 70 दिन पूरे हो चुके हैं, आज 71वां दिन है. किसान अपनी मांगों को लेकर अभी भी अडिग हैं. किसानों का कहना है कि सरकार तीनों कृषि कानून वापस लें. गणतंत्र दिवस के दिन ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा के बाद से जहां किसान प्रदर्शन कर रहे हैं, वहां पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर दिए हैं. दिल्ली के बाहरी इलाकों में निरंतर इंटरनेट को निलंबित कर दिया गया है. इसके साथ ही प्रदर्शनस्थलों के आसपास भारी बैरिकेडिंग और कंटीले तार लगा दी गई है.

इस पर किसान नेताओं और कई विपक्षी पार्टियों ने सरकार पर निशाना साधा है. किसान नेताओं का कहना है कि सरकार के ऐसे कदमों से बातचीत के लिए अनुकूल माहौल नहीं बन पाएगा. वहीं, इस मुद्दे को लेकर संसद में भी भारी हंगामा हुआ है. बता दें, गणतंत्र दिवस के हंगामे से पहले किसानों और सरकार के बीच कई दौर की वार्ता हुई थी, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला था. अब देखना ये है कि क्या सरकार दोबारा किसानों के साथ वार्ता की शुरुआत करेगी या फिर निकालेगी कोई और समाधान.

किसान संगठनों की एक संयुक्त संस्था, संयुक्त किसान मोर्चा के नेता जोगिंदर सिंह उग्राहा मंगलवार को गाजीपुर बॉर्डर अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत से मिलने पहुंचे. गाजीपुर बॉर्डर किसान आंदोलन का नया केंद्र बन चुका है. नए कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर हजारों किसान गाजीपुर में नवंबर से ही डटे हुए हैं. किसानों के प्रदर्शन स्थलों और उसके आसपास कई स्तर की अवरोधक, सड़कों पर लोहे की कीलें, कंटीले तार, सीमेंट के अवरोधकों के बीच लोहे की छड़ें लगाने, डीटीसी बसों एवं अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती जैसी भारी सुरक्षा व्यवस्था की गयी है . यहां तक इस आंदोलन को कवर कर रहे मीडियाकर्मियों को प्रदर्शनस्थलों पर पहुंचने में मुश्किल आ रही है क्योंकि उन्हें पहले चेकिंग और फिर कई स्तर की अवरोध व्यवस्था से गुजरना पड़ता है.

दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के प्रदर्शन स्थलों पर सीमेंट के अवरोधक, कंटीले तार और सड़कों पर लोहे की कीलें लगाये जाने के साथ बड़ी संख्या में पुलिस कर्मियों की तैनात किये जाने के बीच नये कृषि कानूनों को लेकर विपक्ष ने मंगलवार को संसद में हंगामा किया. पिछले साल सितंबर में लागू किये गये केंद्र के तीन नये कृषि कानूनों पर चर्चा कराने की मांग करते हुए विपक्ष के सदस्यों ने आज संसद की कार्यवाही में बाधा डाली, जिसके चलते दोनों सदनों की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने किसानों के आंदोलन स्थलों के निकट पुलिस द्वारा सीमेंट एवं कंटीले तार के अवरोधक बनाए जाने को लेकर मंगलवार को केंद्र सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उसे दीवार की बजाय पुल बनवाने चाहिए. उन्होंने किसान आंदोलन के संबंध में ट्वीट करने वालों के हैंडल ब्लॉक करने को लेकर भी सरकार की आलोचना की. संयुक्त किसान मोर्चा के एक शिष्टमंडल ने मंगलवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की और केन्द्र के नये कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों के विरूद्ध कथित ‘षड्यंत्र’ की न्यायिक जांच कराने का उनसे आग्रह किया. मोर्चा के नेताओं ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि दिल्ली सरकार ने उन्हें सूचित किया है कि दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार 115 किसान तिहाड़ जेल में बंद हैं और मोर्चा ने सभी की मेडिकल बोर्ड से चिकित्सकिय परीक्षण कराने की मांग की.

भारत में जारी किसानों के आंदोलन को लेकर लंदन में एक ओपन पेटिशन स्टार्ट की गई है. इसमें प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा, प्रेस फ्रीडम की अपील की गई है. इस पेटिशन को गुरचरण सिंह ने शुरू किया है, जिसमें भारत की सरकार से अपील की गई है. अगर पेटिशन में लाखों में साइन होते हैं तो ब्रिटिश संसद में ये मसला उठ सकता है. वहीं, भारत में ऑल इंडिया किसान संघर्ष कमेटी द्वारा देश के अलग-अलग हिस्सों में जागरुकता फैलाने की बात कही गई है. तीन फरवरी से दस फरवरी तक देश के अलग-अलग गांवों में आंदोलन को लेकर जागरुकता फैलाई जाएगी.

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