BJP कैसे कर रही बुद्धिजीवियों और अभिनेताओं का इस्तेमाल जानिए

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अभिनेता, सार्वजनिक बुद्धिजीवी, रिटायर्ड पुलिस अधिकारी- बीजेपी ने ऐसे कई लोगों को पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु के आगामी चुनावों में उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतारा है.

जहां पश्चिम बंगाल के कड़े चुनावी संघर्ष में पार्टी, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस द्वारा दिए गए ‘बाहरी’ होने के ताने की धार कुंद करने के लिए, ग्लैमर और बुद्धिमत्ता का सहारा ले रही है, वहीं तमिलनाडु और केरल में अपना जनाधार बढ़ाने के लिए उसने कामयाब सार्वजनिक हस्तियों को चुनाव मैदान में उतारा है.

बंगाल में- जहां 27 मार्च से अभूतपूर्व आठ चरणों में चुनाव मतदान शुरू होना है- बीजेपी ने पत्रकार स्वपन दासगुप्ता, भारत सरकार के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अशोक लाहिरी और बंगाली अभिनेता यश दासुप्ता, पायल सरकार, तनुश्री चक्रबर्ती और अंजना बासु को टिकट दिए हैं.

केरल में पूर्व डीजीपी जेकब टॉमस, ‘मेट्रो मैन’ ई श्रीधरन, फिल्मस्टार कृष्ण कुमार, एक्टर-सिंगर सुरेश गोपी को मैदान में उतारा गया है, जबकि केरल में पार्टी ने पूर्व आईपीएस अधिकारी के अन्नामलाई और अभिनेत्री खुशबू सुंदर को टिकट दिया है, जो पिछले अक्तूबर में पार्टी में शामल हुईं थीं.

सितारों और मशहूर लोगों को मैदान में उतारकर, BJP दोतरफा रणनीति अपना रही है- केरल और तमिलनाडु में अपनी जगह बनाना और कुछ सीटों पर जीतने की क्षमता सुरक्षित करना, जहां BJP की मौजूदगी सीमित है. लेकिन बंगाल में, BJP की रणनीति टीएमसी के ‘बाहरी पार्टी’ होने के आरोप का जवाब देना, तथा कमज़ोर सीटों पर जीत हासिल करना है और साथ ही बंगाली ‘भद्रलोक वर्ग’ को ये संदेश भी देना है कि हमारी पार्टी शासन करने के लिए सत्ता में आ रही है.

बंगाल में ‘बुद्धिजीवी’ चेहरे

टिकट बटवारे में बहुत सी रणनीतियों का ध्यान रखा गया था. मसलन, पार्टी ने उत्तरी बंगाल के अलीपुरद्वार से, पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) और एशियाई विकास बैंक के पूर्व डायरेक्टर, अशोक लाहिरी को मैदान में उतारा है और तारकेश्वर से बीजेपी ने बुद्धिजीवी स्वपन दासगुप्ता को टिकट दिया है, ताकि वो पढ़े-लिखे बंगाली बुद्धिजीवियों तक पहुंच सकें, जो पार्टी के हिंदू राष्ट्रवाद के रुख से बहुत प्रभावित नहीं हैं.

लाहिरी फिलहाल 15वें वित्त आयोग के सदस्य के रूप में सेवारत हैं. वो वाजपेयी सरकार में सीईए थे, जब जसवंत सिंह वित्त मंत्री थे और बाद में उन्होंने बंधन बैंक के अध्यक्ष के तौर पर भी काम किया, जब स्वर्गीय बीजेपी नेता अरुण जेटली वित्त मंत्री थे. बीजेपी ने अशोक लाहिरी और स्वपन दासगुप्ता को, शिक्षित वर्ग के उन लोगों तक पहुंचने के लिए चुना, जिनके मन में राष्ट्रवाद को लेकर आशंकाएं हैं, चूंकि बंगाल बौद्धिक रूप से सशक्त प्रांत है और वो लोग पढ़ाई-लिखाई, संगीत, सिनेमा से लगाव के लिए जाने जाते हैं.

बंगाल ने देश को कई नोबल विजेता दिए हैं. BJP को उन मतदाताओं को बौद्धिक और शिक्षित चेहरे दिखाने हैं, जिन्हें BJP केराष्टवाद के रुख को लेकर शंकाएं हैं. बीजेपी सूत्रों ने कहा कि टीएमसी शासन के दौरान, बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पूर्व फिक्की महासचिव अमित मित्रा को वित्त मंत्री बनने के लिए राज़ी कर लिया था, इसलिए बीजेपी मित्रा की टक्कर पर लाहिरी को लाना चाहती है और अगर उनकी सरकार बनती है, तो वो वित्त मंत्री बनेंगे.

बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने दिप्रिंट से कहा, ‘हम ये संदेश देना चाहते हैं, कि हम सत्ता में आ रहे हैं, और हमने लोगों की विशेषज्ञता को ध्यान में रखते हुए, चुनाव लड़ने के लिए उनका चयन किया है. इससे संदेश जाएगा कि हमारे सरकार बनाने के बाद, बीजेपी के पास ऐसे लोग हैं, जो राज्य का शासन चलाने में निपुणता रखते हैं. ममता के कई टीवी और फिल्म स्टार्स को टिकट देने से बीजेपी ने इसकी काट करने की कोशिश में कई जानी-मानी बंगाली हस्तियों को मैदान में उतारा है, जो जनता के फैसलों को प्रभावित कर सकती हैं.

बंगाली फिल्म अभिनेता यश दासगुप्ता को चंदीलता, पायल सरकार को बेहाला पुरबा, तनुश्री चक्रबर्ती को हावड़ा श्यामपुर, और अंजना बासु को सोनारपुर साउथ से टिकट दिए गए हैं. बीजेपी महिला मोर्चा प्रमुख और फैशन डिज़ाइनर अग्निमित्रा पॉल ने दिप्रिंट से कहा, ‘बंगाल दूसरे सूबों से अलग है. यहां लोग बौद्धिक पूंजी को महत्व देते हैं. फिल्म स्टार्स के बड़ी संख्या में चाहने वाले हैं और ये स्टार जन्म से स्टार नहीं हैं. इन्होंने अपनी जगह खुद बनाई है और इनकी स्टार पावर के साथ न सिर्फ सीटें जीतना आसान होता है बल्कि ये जनता की राय को प्रभावित करने में भी सहायक होते हैं’.

स्टार पावर से केरल, तमिलनाडु में बढ़ेगी मौजूदगी

बंगाल के उलट, जहां अभी भी लगता है कि पार्टी के पास टीएमसी से सत्ता छीनने का मौका है, केरल और तमिलनाडु में पार्टी की लड़ाई अपनी मौजूदगी को बढ़ाने और प्रदर्शन को सुधारने की है. केरल में, अभिनेता से नेता बने सुरेश गोपी त्रिसूर से चुनाव लड़ेंगे, जबकि पूर्व डीजीपी जेकब टॉमस इरिंजालाकुड़ा से लड़ रहे हैं. ‘मेट्रो मैन’ श्रीधरन पलक्काड़ से मैदान में हैं, जबकि मलयालम अभिनेता कृष्ण कुमार, जो पिछले महीने ही बीजेपी में शामिल हुए हैं, तिरुवनंतपुरम सेंट्रल से चुनाव लड़ेंगे.

तमिलनाडु में, खुशबू सुंदर चेन्नई के थाउज़ेंड लाइट्स चुनाव क्षेत्र से चुनाव लड़ रही हैं, जबकि के अन्नामलाई को अरावाकुरूची से उम्मीदवार बनाया गया है. केरल बीजेपी प्रमुख के सुरेंद्रन ने कहा, ‘बीजेपी को दो गठबंधनों एलडीएफ और यूडीएफ के बीच, अपनी जगह बनानी है. सूबे की राजनीति इन दोनों के बीच बंटी हुई है. हमारी शुरूआती चुनौती इन्हें एक अच्छी टक्कर देना है, इसलिए ऐसे लोगों का चयन किया गया है, जिनकी अपनी साख है और जिन्होंने समाज में योगदान दिया है’. एक दूसरे बीजेपी नेता ने, जो नाम नहीं बताना चाहते थे, दिप्रिंट से कहा कि जाने-पहचाने चेहरों को टिकट देने से पार्टी की स्वीकार्यता और जीतने के अवसर बढ़ जाते हैं, खासकर ऐसी जगहों पर जहां वो कमज़ोर हैं.

वाजपेई-आडवाणी के दौर में यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी जैसे सार्वजनिक बुद्धिजीवी बीजेपी में शामिल हुए थे. लेकिन ये 2004 लोकसभा चुनावों के दौरान ही था, जब बीजेपी नेता स्वर्गीय प्रमोद महाजन ने- जो चुनाव प्रभारी थे- धर्मेंद्र और हेमा मालिनी से लेकर अनूप जलोटा जैसी बॉलीवुड हस्तियों और नवजोत सिंह सिद्धू को पार्टी में शामिल कराया. अनुपम खेर और परेश रावल के बीजेपी में आने से पहले मशहूर हस्तियों के लिए पार्टी के दरवाज़े खोलने की महाजन की पहल ने बहुत से क्षेत्रों में बीजेपी की मौजूदगी को बढ़ावा दिया.

(यह लेख दि प्रिंट से लिया गया है)

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