सरकार और किसानों के बीच बातचीत खत्म, नहीं निकला कोई हल, किसानो ने किया ऐलान

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कृषि कानून पर किसानों और सरकार के बीच 7वें दौर की बातचीत खत्म हो गई है. बातचीत में आज भी कोई हल नहीं निकल सका है. किसान नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर अड़े हुए हैं. वहीं, सरकार इन कानूनों में संशोधन करने की बात कह रही है.

बैठक के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि हम एमएसपी पर सारी बातें मानने को तैयार हैं. किसानों से उन्होंने कहा कि आप बातचीत करें और अपनी मांगें रखें. किसान संगठनों और सरकार के बीच अब अगली बैठक 8 जनवरी को होगी. आपको बता दे कि हरियाणा में महिलाएं ट्रैक्टर चलाने के लिए ट्रेनिंग ले रही हैं. गौरतलब है कि ये महिलाएं 26 जनवरी को दिल्ली में प्रस्तावित ट्रैक्टर परेड में हिस्सा लेंगी. दरअसल किसानों का कहना है कि अगर केंद्र सरकार ने कृषि कानून वापिस नहीं लिए तो वे दिल्ली में गणतंत्र दिवस वाले दिन ट्रैक्टर परेड करेंगे. संयुक्त किसान मोर्च ने ये जानकारी दी है.

किसानों ने ये बात ऐसे वक्त में की है जब उन्हें दिल्ली की सीमा पर डटे एक महीने से भी ज्यादा समय बीत चुका है. किसान 26 जनवरी वाले दिन ट्रैक्टरों की परेड दिखाएंगे. किसान क्रांतिकारी यूनियन के दर्शनपाल ने कहा है, अगर 4 जनवरी को सरकार हमारी बात नहीं मानती है तो हम कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे पर 6 जनवरी को मार्च करेंगे. इस दिन हम गणतंत्र दिवस वाले दिन अपनी परेड की रिहर्सल करेंगे.

किसान नेताओं का कहना है, सरकार को बयान देना होगा कि वे तीनों कानूनों को वापिस लेने जा रहे हैं और एमएसपी की कानूनी गारंटी दे रहे हैं. अगर ऐसा 26 जनवरी तक नहीं होता है तो फिर हम शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली में दाखिल होंगे. किसान अपने ट्रैक्टर और ट्रॉली लेकर दिल्ली में किसान परेड करेंगे. ठीक इसी तरह की झांकी निकालने की योजन न सिर्फ दिल्ली में है बल्कि कई राज्यों की राजधानी और जिलों में भी है. 26 जनवरी को ध्यान में रखते हुए किसानों ने आंदोलन के लिए पूरी योजना बना रखी है. लोहड़ी के त्योहार के मौके पर किसान संकल्प दिवस मनाया जाएगा.

इस दिन किसान तीनों कृषि कानूनों की होली जलाएंगे. 18 जनवरी को महिला किसान दिवस मनाया जाएगा. नेताजी सुभाष की जयंती वाले दिन यानी 23 जनवरी को सभी राज्यों की राजधानियों में राजभवन के पास किसान विरोध जाहिर करेंगे. पंजाब किसान नेता बलबीर सिंह ने कहा, हम शांतिपूर्वक तरीके से इतने लंबे समय से विरोध कर रहे है. लेकिन ये सरकार अहंकारी है. हमने हमेशा सरकार से कहा है कि उसके पास केवल दो विकल्प हैं– या तो तीन कानूनों को निरस्त करें या हम पर बल प्रयोग करें. उन्होंने कहा, हम शांतिपूर्ण विरोध करेंगे, हम किसी भी टकराव में नहीं उलझेंगे. लेकिन अगर सरकार पुलिस का इस्तेमाल करना चाहती है, तो यह उनकी पसंद है.

सरकार के मंत्रियों के साथ वार्ता के बाद किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि 8 जनवरी 2021 को सरकार के साथ फिर से मुलाकात होगी. उन्होंने कहा कि तीनों कृषि कानूनों को वापिस लेने पर और MSP के मुद्दे पर 8 तारीख को फिर से बात होगी. उन्होंने कहा कि हमने सरकार को बता दिया है कानून वापसी नहीं तो घर वापसी नहीं. नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में किसान संगठनों और सरकार के मंत्रियों के बीच चल रही मीटिंग आज फिर बेनतीजा खत्म हो गई. आज दोनों पक्षों के बीच 8वें दौर की मीटिंग थी. आज की बैठक में किसान सिर्फ कानून वापसी की मांग पर ही अड़े रहे. सरकार के मंत्रियों ने कहा कि वे एक बार फिर से किसान संगठनों से बात करेंगे. दोनों पक्षों के बीच अगले दौर की वार्ता 8 जनवरी को होगी.

बातचीत शुरू होने से पहले आंदोलन में मारे गए लोगों के लिए दो मिनट का मौन रखा गया.दिल्ली में भारी बारिश और हाड़ कंपा देने वाली ठंड के बावजूद किसान सिंघु बॉर्डर समेत कई सीमाओं पर मोर्चेबंदी पर डटे हुए हैं. किसानों ने अल्टीमेटम दिया है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी जाती हैं तो वे अपने आंदोलन को और तेेेज करेंंगे.आखिरी दौर की बैठक में सरकार ने किसानों की दो मांगें मान ली थीं. सरकार ने बिजली संशोधन बिल को वापस लेने और पराली जलाने से रोकने के लिए बने वायु गुणवत्ता आयोग अध्यादेश में बदलाव का भरोसा किसान नेताओं को दिया था.

हालांकि कृषि कानूनों पर पेंच फंसा हुआ है. किसान सितंबर से ही इन कानूनों का विरोध करते हुए आंदोलन कर रहे हैं. दिल्ली की कई सीमाओं पर किसान 26 नवंबर से आंदोलन कर रहे हैं. बैठक से पहले ही किसान संगठनों के नेताओं ने कह द‍िया था क‍ि वे सरकार के सामने नया विकल्प नहीं रखेंगे. दरअसल, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने पिछली बैठक में किसान संगठनों से अनुरोध किया था कि कृषि सुधार कानूनों के संबंध में अपनी मांग के अन्य विकल्प दें, जिस पर सरकार विचार करेगी. पिछली बैठक में शामिल किसान नेताओं ने कहा था कि सरकार ने संकेत दिया है कि वह कृषि कानूनों को वापस नहीं लेगी. उसने इसे लंबी और जटिल प्रक्रिया बताया था.

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