पंजाब कांग्रेस में नवजोत सिंह सिद्धू को नई जिम्मेदारी देने की तैयारी

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Navjot Singh Sidhu

पंजाब की सियासी पिच पर पिछले दो साल से गायब दिख रहे कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू एक बार फिर राजनीति में ताबड़तोड़ बैटिंग करते नजर आने वाले हैं. दरअसल सिद्धू को पंजाब की राजनीति में एक बार फिर सक्रिय भूमिका में लाने की तैयारी चल रही हैं.

कांग्रेस ने नवजोत सिंह सिद्धू और पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के बीच पिछले काफी समय से चल रहे विवाद को सुलझाने की जिम्मेदारी राज्य के नए प्रभारी हरीश रावत को दी है. खबर है कि कांग्रेस नवजोत सिंह सिद्धू को केंद्रीय नेतृत्व में कोई नई भूमिका देने की तैयारी कर रही है. बता दें कि सिद्धू और कैप्टन के बीच पिछले काफी समय से चल रहे विवाद को सुलझाने का ​जिम्मा अब पंजाब के नए प्रभारी हरीश रावत को सौंपा गया है. हरीश रावत को पंजाब का नया प्रभारी बनाने की रणनीति कांग्रेस के लिए कारगर साबित हुई है.

ऐसे में अब कांग्रेस नवजोत सिंह सिद्धू को कोई नई जिम्मेदारी देना चाहती है. हालांकि सिद्धू को नई जिम्मेदारी पर फैसला उनकी सहमति के बाद ही लिया जाएगा. कांग्रेस ने सिद्धू को लेकर जिस तरह की तैयारी की है उसके मुताबिक कैप्टन सरकार में उन्हें बतौर मंत्री जगह दी जा सकती है. वहीं दूसरी तरफ उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की कमान भी सौंपी जा सकती है. बता दें कि पंजाब के वर्तमान अध्यक्ष सुनील जाखड़ का कार्यकाल भी पूरा होने वाला है, ऐसे में सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष का पद भी सौंपा जा सकता है. ऐसे में उन्हें संगठन की बागडोर सौंपकर पार्टी भविष्य का खाका भी तैयार करना चाहती है.

बीजेपी के प्रचार के सामने झुक गए राज्यपाल: अमरिंदर

पश्चिम बंगाल के बाद अब पंजाब में राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच की लड़ाई खुल कर सामने आ गई है और मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के इशारे पर राज्य सरकार को निशाने पर लेने का आरोप लगाया है. मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने आरोप लगाया है कि राज्यपाल वी. पी. सिंह वडनोर ने बीजेपी के प्रचार से प्रभावित होकर दूरसंचार के टॉवरों से तोड़फोड़ के मामले में राज्य के आला अफ़सरों को तलब किया है. उन्होंने बीजेपी के प्रचार के सामने झुकने का आरोप लगाते हुए राज्यपाल से कहा है, यदि आपको कोई स्पष्टीकरण चाहिए तो मुझे तलब करें, मेरे अधिकारियों को नहीं.

उन्होंने एक बयान में कहा है, हालांकि बीजेपी ने राज्य में क़ानून व्यवस्था का मुद्दा सिर्फ कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ चल रहे आन्दोलन से ध्यान बँटाने के लिए उठाया है, यदि राज्यपाल इस पर चिंतित हैं तो उन्हें इस मुद्दे पर सीधे मुझसे बात करनी चाहिए क्योंकि गृह मंत्रालय मेरे पास है. कैप्टन सिंह ने कहा, ऐसे समय जब पंजाब के किसानों का अस्तित्व ही दाँव पर लगा है, बीजेपी ओछी राजनीति में लगी हुई है और अपने एजेंडे को बढ़ाने के लिए राज्यपाल के संवैधानिक पद को भी खींच कर इसमें ला रही है.

बता दें कि कृषि क़ानून 2020 के ख़िलाफ़ किसान आन्दोलन में लगे संगठनों ने रिलायंस जियो का बॉयकॉट करने की अपील की थी. इसके बाद पंजाब में रिलायंस जियो के लगभग 1,500 दूरसंचार टॉवर के साथ तोड़फोड़ की गई. ख़ुद मुख्यमंत्री ने इसका संज्ञान लेते हुए इसकी आलोचना की थी और पुलिस से कहा था कि ऐसा करने वालों के कड़ी कार्रवाई करे. लेकिन ताज़ा बयान में उन्होंने कहा है कि, बीजेपी शांतिपूर्ण किसान आन्दोलन को कमज़ोर कर रही है औ कुछ मोबाइल टॉवरों को नुक़सान पहुँचाने की छोटी-मोटी घटनाओं को क़ानून व्यवस्था की समस्या बता रही है.

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