किसान आंदोलन की मजबूती की तैयारी

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गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में हुई हिंसा के बाद खत्म होता नजर आया किसान आंदोलन और जोर पकड़ गया. प्रदेशभर में जहां पंचायतों ने इसे मजबूत करने का फैसला लिया है, वहीं चरखी दादरी में फोगाट खाप ने तो और भी कड़े फैसले लिए हैं. इनके मुताबिक अब हर घर से एक आदमी 3 दिन के लिए दिल्ली बॉर्डर पर धरने में शामिल होगा, वहीं पंचायत ने प्रदेश के भाजपा और जजपा नेताओं के सामाजिक बहिष्कार का भी ऐलान कर दिया है.

कहा है कि अगर कोई भी यहां आया तो उसके कपड़े फाड़ दिए जाएंगे. बता दें कि गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में हुई हिंसा के बाद लगभग हर तरफ धरने समाप्ति की ओर बढ़ने लग गए थे. गुरुवार को उत्तर प्रदेश के किसान नेता राकेश टिकैत का एक वीडियो वायरल होने के बाद आंदोलनकारी फिर से वापस धरने पर लौटने के मूड में आ गए. इसी बीच चरखी दादरी में गुरुवार को फोगाट खाप की तरफ से सर्वजातीय पंचायत का आयोजन किया गया.

सर्वजातीय पंचायत में डिप्टी CM दुष्यंत चौटाला, सांसद धर्मबीर सिंह और चेयरमैन राजदीप फोगाट के सामाजिक बहिष्कार का ऐलान किया गया है. इस दौरान सभी किसानों ने एक सुर में सरकार के विरोध का ऐलान कर दिया. इस बारे में खाप के प्रधान बलवंत फोगाट ने बताया कि सर्वजातीय खाप फोगाट-19 की बैठक में आज कई बड़े फैसले लिए गए हैं. इनमें सबसे बड़ा फैसला खाप के 19 गांवों में भाजपा-जजपा नेताओं को नहीं घुसने देने का है.

उन्होंने ऐलान किया कि अगर इन दोनों पार्टियों का कोई भी नेता खाप के 19 में से किसी भी गांव में आया तो उसके कपड़े फाड़ दिए जाएंगे. साथ ही जिले की दूसरी खापों से भी इन नेताओं के बहिष्कार की अपील की जाएगी. बलवंत ने बताया कि खाप के हर गांव के हर घर से एक आदमी को 3 दिन लगातार गाजीपुर बॉर्डर जाने का फैसला किया गया है. हर हाल में 36 बिरादरी को किसान नेता राकेश टिकैत को मजबूत करना है. पहले की तरह खाने-पीने का सामान भी लेकर जाना है. उन्होंने कहा कि हम हर कुर्बानी देने को तैयार हैं. किसी भी हालात में पीछे नहीं हटेंगे.

किसान नेता राकेश टिकैत बोले- 40 सेकंड में हमारा आंदोलन फिर से हुआ शुरू

भारतीय किसान यूनियन के नेता और गाजीपुर बॉडर्र पर आंदोलन की अगुवाई कर रहे राकेश टिकैत ने आज मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि 40 सेकंड में हमारा आंदोलन फिर से शुरू हो गया. उन्होंने कहा कि गुरुवार दंगे से भी खतरनाक स्थिति थी. अपनी जान को खतरा होने का दावा करते हुए उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन स्थल पर सशस्त्र गुंडों को भेजा गया था. टिकैत ने कहा, गाजीपुर की सीमा पर कोई हिंसा नहीं हुई है लेकिन इसके बाद भी उत्तर प्रदेश सरकार दमन की नीति का सहारा ले रही है.

राकेश टिकैत ने कहा कि हमारा आंदोलन शांतिपूर्ण जारी रहेगा. गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड के दौरान हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस की प्राथमिकी में नामजद नेताओं में से एक टिकैत ने एक बार फिर दोहराया कि लाल किले की घटना की न्यायिक जांच होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि उनके संगठन ने गणतंत्र दिवस पर लाल किले में हुई घटना में शामिल दीप सिद्धू का सामाजिक बहिष्कार कर दिया है.

गाजीपुर बॉडर्र पर आंदोलन की अगुवाई कर रहे राकेश टिकैत के आंसू काम कर गए, उनकी अपील के बाद किसानों का हुजूम गाजीपुर पर एक बार फिर जमा हो गया. स्थिति को भाप कर जिला प्रशासन ने यू टर्न लेते हुए पुलिस की संख्या को नियंत्रित कर दिया. गाजीपुर बॉडर्र पर शुक्रवार सुबह एक बार फिर आंदोलनकारियों की चहल कदमी बढ़ती भी नजर आने लगी है. गत 26 जनवरी को दिल्ली के लाल किले पर हुई हिंसक घटनाओं के बाद किसानों का मनोबल टूट गया था कई किसान पुलिस की प्राथमिकी के बाद गिरफ्तारी के डर से अपने-अपने स्थानों पर वापस लौटने लगे थे इसी बात का फायदा उठाकर उत्तर प्रदेश सरकार ने भी किसानों को खदेडऩे की योजना पर काम शुरू कर दिया.

गुरुवार सुबह से ही गाजीपुर बॉडर्र पर पुलिस का जमावड़ा यकायक बढ़ गया. इस दौरान पुलिस ने कई बार फ्लैग मार्च भी निकाला और किसानों को हल्के बल के साथ खदेडऩे का प्रयास भी किया. जिला प्रशासन ने किसानों को सीमा क्षेत्र खाली करने के लिए नोटिस भी दे दिया था इसके बाद कुछ पुलिसकर्मी राकेश टिकैत को मंच से हटाने के लिए पहुंच गए. हालांकि इससे पूर्व किसान यूनियन के अध्यक्ष नरेश टिकैत आंदोलन को समाप्त किए जाने की सहमति व्यक्त कर चुके थे.

लेकिन मंच पर पहुंची पुलिस और बलपूर्वक हटाने के प्रयास के बाद राकेश टिकैत के आंसू ने सारी बाजी पलट दी. टिकट के आंसू के बाद किसान यूनियन ने आंदोलन समाप्ति की सहमति को वापस लेकर इसे जारी रखने की घोषणा कर दी रातों रात पश्चिमी उत्तर प्रदेश कई के कई जनपदों से ट्रैक्टरों पर सवार होकर किसान नेता गाजीपुर बॉडर्र पर पहुंच गए. सुबह होते होते हजारों की संख्या में ट्रैक्टरों का रेला गाजीपुर पर जमा हो गया. आंदोलन स्थल पर मौजूद उन लोगों का कहना है कि उनके नेता के आंसू जाया नहीं जाएंगे.

गाजीपुर बॉडर्र पर देर रात पहुंचे किसानों का हुजूम खुले आसमान के नीचे सोने पर विवश रहा. यहां तक की कई किसान नेता मंच के सामने ही बिस्तर लगा कर लेटे हुए नजर आए. इससे पूर्व बुधवार की शाम से ही जिला प्रशासन ने गाजीपुर बॉडर्र पर लगाए गए सार्वजनिक चलते-फिरते शौचालय पानी की आपूर्ति एवं अन्य सुविधाएं हटा ली थी. इस घटना के बाद जिला प्रशासन के अधिकारी अभी कुछ भी बताने को तैयार नहीं है उनका केवल इतना ही कहना है की वह स्थिति का जायजा लेकर सरकार को सूचित करने का काम कर रहे हैं.

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