पंजाब के किसानों ने बीजेपी नेताओं को भेजा नोटिस

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किसान आंदोलन शुरू होने के बाद से ही बीजेपी के बड़े नेताओं और यहां तक केंद्र की सरकार के मंत्रियों ने भी इसमें खालिस्तानियों की एंट्री होने, आंदोलन को वामपंथियों का समर्थन होने का आरोप लगाया. इसे लेकर किसानों ने पहले भी नाराज़गी ज़ाहिर की और अब बीजेपी के तीन नेताओं को क़ानूनी नोटिस भेज दिया है.

पंजाब के किसानों ने केंद्र सरकार के मंत्री गिरिराज सिंह, गुजरात में उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल और बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव राम माधव को मानहानि वाले बयानों को लेकर नोटिस भेजा है. नोटिस में इन नेताओं से अपने बयानों को लेकर बिना शर्त माफ़ी मांगने और बयानों को वापस लेने की मांग की गई है.

अमृतसर के रहने वाले किसान जसकरण सिंह बांदेशा ने गिरिराज सिंह को भेजे नोटिस में कहा है कि किसानों ने देश को अपना खून-पसीना दिया है और उन्हें इस देश की अर्थव्यवस्था और कृषि व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है. नोटिस में कहा है कि गिरिराज सिंह ने एक इंटरव्यू के दौरान हाल ही में कहा, आंदोलन में किसान के हित की बातें नहीं हो रही हैं. आज किसान आंदोलन में विदेशी ताक़तें घुस रही हैं. आंदोलन में खालिस्तान और शरजील इमाम के पोस्टर्स लगाए जा रहे हैं.

जालंधर के किसान रमनीक सिंह रंधावा की ओर से नितिन पटेल को भेजे गए नोटिस के मुताबिक़ पटेल ने कहा, किसानों के नाम पर देश विरोधी तत्व, आतंकवादी, खालिस्तानी, कम्युनिस्ट और चीन समर्थित लोग आंदोलन में घुस रहे हैं. नोटिस के मुताबिक़, पटेल ने यह भी कहा कि हम उन्हें, पिज्जा, पकौड़ी खाते देख रहे हैं और यह सब फ्री है, राष्ट्रविरोधी तत्व उन्हें वहां बैठने के लिए लाखों रुपये दे रहे हैं. संगरूर के किसान सुखविंदर सिंह सिद्धू ने राम माधव को भेजे नोटिस में उन पर किसान आंदोलन को बदनाम करने का आरोप लगाया है.

किसानों के आंदोलन में चीन और पाकिस्तान का हाथ होने के अलावा ट्विटर पर खालिस्तानी-वामपंथी भाई-भाई भी ट्रेंड कराया जा चुका है. आंदोलन को बदनाम करने वाले बयान देने वालों में वरिष्ठ मंत्री रविशंकर प्रसाद से लेकर, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत कुमार गौतम और अरुण सिंह का नाम शामिल है. इसके अलावा केंद्रीय मंत्री राव साहब दानवे, हरियाणा सरकार के मंत्री जेपी दलाल इसमें चीन-पाकिस्तान का हाथ बता चुके हैं. लेकिन ऐसे लोगों को ट्विटर पर कड़ा जवाब भी मिल रहा है.

किसान आंदोलन का समर्थन करने वाले पंजाबी गायकों और किसान नेताओं के ख़िलाफ़ जांच एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है. आढ़तियों के ख़िलाफ़ इनकम टैक्स (आईटी) विभाग छापेमारी से लेकर नोटिस देने की कार्रवाई कर चुका है. आढ़तियों के शीर्ष संगठन फ़ेडरेशन ऑफ़ आढ़तिया एसोसिएशंस ऑफ़ पंजाब ने आरोप लगाया था कि आढ़तियों को इसलिए निशाना बनाया जा रहा है, क्योंकि वे कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ हैं और किसानों के आंदोलन में उनके साथ हैं.

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