सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियोस के जरिए पुलिस पर उठे सवाल

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सिंघु बॉर्डर और गाजीपुर तथा टिकरी बॉर्डर से लगातार ऐसी खबरें आ रही है कि किसानों और कुछ लोगों के बीच पत्थरबाजी तथा एक दूसरे पर हमला हो रहा है. लेकिन सोशल मीडिया पर कुछ वीडियोस वायरल हो रहे हैं, जिसमें साफ दिख रहा है कि कुछ लोग नकाब पहनकर किसानों पर हमला करते हुए दिखाई दे रहे हैं.

वीडियोस को देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि कुछ नकाबपोश किसानों पर हमला बोल रहे हैं. सोशल मीडिया पर कुछ लोग आरोप लगा रहे हैं कि सिंघु हो या गाजीपुर या फिर टिकरी, पुलिस स्थानीय लोगों के भेष में कुछ मुट्ठी भर लोगों को लाकर नारेबाजी करवा रही है. फिर हालात पर काबू करने के नाम पर किसानों को पीट रही है.

वरिष्ठ पत्रकार रोहिणी सिंह ने ट्वीट करते हुए लिखा कि धारा 144 लागू थी, चप्पे चप्पे पर पुलिस बल तैनात था, मीडिया छोड़िए पानी तक की गाड़ी अंदर नहीं आ सकती थी. पर इस चाक चौबंद सुरक्षा के बीच कुछ ‘स्थानीय लोग’ वहाँ ‘नकाब’ पहन कर, अपनी गाड़ी लेकर आराम से अंदर घुसे और उपद्रव करने लगे. वाह क्या सीन है!

इसके अलावा एक अन्य ट्वीट में रोहिणी सिंह ने लिखा कि आप क्रोनोलाजी समझिए: पहला स्टेप- शांतिप्रिय आंदोलन में गुंडे भेज कर उसकी छवि बिगाड़ी जाए दूसरा स्टेप- 2 रु Per ट्वीट खर्च कर हिंसा के वीडियो फैलाए जाएँ फाइनल स्टेप- गोदी मीडिया का सहारा लेकर जाति और धर्म के आधार पर उन्हें आतंकवादी, खलिस्तानी, नक्सल आदि का प्रमाणपत्र दिया जाए.

इसी तरीके से स्वतंत्र पत्रकार रणविजय सिंह लिखा कि ये गुंडा कौन है जो पुलिस के बीच से आसानी से निकल गया? कोमल शर्मा 2.

आपको बता दें कि जिस तरीके की घटनाएं हो रही है वह कोई पहली बार नहीं हो रही है इससे पहले भी शाहीन बाग आंदोलन के समय पुलिस सुरक्षा के बीच कुछ लोग घुस आए थे और आंदोलनकारियों पर गोलियां तक चला दी थी. और पुलिस देखती रह गई थी

 

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