राकेश टिकैत ने बताया, किसके इशारे पर हुई थी लालकिले पर हिंसा

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Rakesh-Tikait

गणतंत्र दिवस के मौके पर लालकिले में हुई हिंसा और धार्मिक झंडा फहराने के मामले में मुख्य आरोपी दीप सिद्धू को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गिरफ्तार कर लिया है. दिल्ली पुलिस ने दीप सिद्धू समेत चार लोगों पर एक-एक लाख रुपये का इनाम रखा था.

ये सभी लालकिले के अंदर उपद्रव करने, धार्मिक झंडा फहराने और लोगों को उकसाने के आरोपी थे. इसी बीच किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि सरकार ये बताए किसके इशारे पर लालकिले में हिंसा हुई थी. साथ ही उन्होंने कहा कि इस आंदोलन को शाहीनबाग़ ना बनाया जाए.

किसान नेता राकेश टिकैत ने पत्रकार से बातचीत करते हुए कहा कि ये सरकार है और बिल वापस ना हो इसलिए उलझाना चाहती है. हमारा सवाल फसलों के रेट का है, तीन बिल को लेकर है. दीप सिद्धू के मामले को इतना तूल ना दिया जाए. सरकार इन तीन बिलों को वापस ले ले और एमएसपी पर कानून बना दे, इसी से हम किसानों का भला हो जाएगा.

साथ ही टिकैत ने यह कहा कि 1988 में महेंद्र सिंह टिकैत दिल्ली में आंदोलन के लिए आये थे लेकिन कोई संसद भवन नहीं जा पाया. लेकिन किसी से शाम 7 बजे बयान दिलवाया जाता है और वह 13 घंटे बाद लाल किला पहुँच जाता है. कौन लेकर गया, किसने रास्ते दिए ये जांच का विषय है. इसके अलावा टिकैत ने कहा कि व्यापारी प्राथमिक हो गया और हमारा तिरंगा झंडा दूसरे स्थान पर हो गया. ये इस देश में नहीं चलेगा.

राकेश टिकैत ने यह भी कहा कि हिंसा सरकार ही करवा सकती है क्योंकि ये उनके ही एजेंडे में होते हैं. ये तो चक्रव्यूह में किसान फंसा नहीं. वो जो राजनीति इस देश में करना चाहते हैं उन्हें नहीं करना चाहिए. ये किसानों का आन्दोलन है और इसे शाहीनबाग़ ना बनाया जाए और ना ही उससे तुलना की जाए. बिना कानून वापस हुए कोई यहाँ से वापस नहीं जाएंगे.

साथ ही उन्होंने कहा कि जिस तरह से शाहीनबाग़ के लोगों को उठवाया गया वैसे ही सरकार किसानों को भी उठवाना चाहती है. इसके अलावा टिकैत ने कहा कि जो पत्थरबाज शाहीनबाग़ गए थे वे ही यहाँ भी आये थे. लालकिले पर धार्मिक झंडा फहराने और हिंसा के लिए लोगों को उकसाने के लिए दिल्ली पुलिस ने दीप सिद्धू के खिलाफ देशद्रोह और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत मामला दर्ज किया था.

दीप सिद्धू को पकड़ने के लिए पंजाब और दिल्ली में कई जगहों पर रेड डाली गई थी. 26 जनवरी की घटना के मामले पुलिस ने 44 एफआईआर दर्ज की हैं और अब तक 127 लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है.

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