दिशा रवि पर आया राकेश टिकैत का बयान

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जिस किसान आंदोलन को लेकर पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग के टूलकिट को लेकर 21 साल की एक लड़की दिशा रवि को गिरफ्तार किया गया. इसी किसान आंदोलन के एक अहम चेहरे राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) का पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि (Disha Ravi) की गिरफ्तारी पर क्या राय है?

टिकैत का कहना है कि जब सरकार से बात होगी तो ये तमाम मुद्दे उठेंगे. राकेश टिकैत ने कहा कि ये गांव के लोगों का आंदोलन है. इस आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए किसी ‘टूलकिट’ की जरूरत नहीं है. हमें टूलकिट के बारे में कोई जानकारी नहीं है. ये क्या बीमारी है, इसके बारे में पढ़ेंगे फिर पता चलेगा कि ये क्या होती है?

टिकैत कहते हैं कि – दिशा रवि पेड़ लगाने का काम करती थी, उसे पुलिस ने क्यों पकड़ा ये हमें नहीं मालूम. जो लोग, जो बच्चे यहां (प्रदर्शन स्थल) पर नहीं आए उन्हें भी पुलिस पकड़ रही है. बहुत लोगों पर मुकदमा किया जा रहा है. टिकैत ने कहा है कि जब भी सरकार से बातचीत होगी इन तमाम मुद्दों को किसान नेता उठाएंगे.

टूलकिट केस (Toolkit Case) और दिशा रवि

ग्रेटा थनबर्ग ने 3 फरवरी को किसान प्रदर्शन के समर्थन में एक ट्वीट किया और उसके साथ एक ‘Toolkit शेयर की. लेकिन अगले ही दिन उन्होंने वो ट्वीट ये कहते हुए डिलीट कर दिया कि वो पुरानी टूलकिट थी. 4 फरवरी को ग्रेटा ने एक बार फिर किसानों के समर्थन में ट्वीट किया और एक नया टूलकिट शेयर किया, जिसमें उन्होंने लिखा, ये नई Toolkit है जिसे उन लोगों ने बनाया है जो इस समय भारत में जमीन पर काम कर रहे हैं. इसके जरिये आप चाहें तो उनकी मदद कर सकते हैं.

पुलिस को उसी टूलकिट से आपत्ति है, जिसे वो 26 जनवरी को दिल्ली के लाल किले में हुए हिंसक प्रदर्शन से जोड़कर देख रही है. दिल्ली पुलिस के आधिकारिक ट्वीट के मुताबिक, दिशा रवि उस टूलकिट की एडिटर हैं और उस दस्तावेज को तैयार करने और उसे सोशल मीडिया पर सर्कुलेट करने वाली मुख्य ‘आरोपी’ हैं. पुलिस के मुताबिक, दिशा रवि (Disha Ravi) ने ही स्वीडन की ग्रेटा थनबर्ग को टूलकिट मुहैया कराई थी. पुलिस का कहना है कि दिशा के कहने पर ही ग्रेटा ने पहले वाले टूलकिट को डिलीट किया और अगले दिन इसका एडिटेड वर्जन शेयर किया.

बता दे कि दिल्ली पुलिस ने बेंगलुरु की सामाजिक व पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि को यह कह कर गिरफ़्तार कर लिया कि उन्होंने भारत में चल रहे किसान आन्दोलन से जुड़े ग्रेटा तनबर्ग के टूलकिट को एडिट कर कई लोगों को भेजा. उसके बाद से ही टूलकिट पर चर्चा होने लगी. सत्तारूढ़ बीजेपी के लोगों ने टूलकिट को ही मुद्दा बनाया है और इसे इस तरह प्रचारित किया है मानो टूलकिट बनाना ही अपने आप में गुनाह हो. एक नेता ने तो यहाँ तक कह दिया कि जब देश पीपीई किट बना रहा था, ये लोग टूलकिट बना रहे थे.

क्या होता है टूलकिट?

साधारण व सपाट शब्दों में कहा जाए तो टूलकिट एक गूगल डॉक्यूमेंट होता है. इसमें एक्शन प्वाइंट्स दर्ज होते हैं, यानी क्या-क्या करना है, यह लिखा जाता है. इस पर यह भी लिखा जा सकता है कि किसी समस्या के समाधान के लिए क्या-क्या किया जाना चाहिए. टूलकिट का इस्तेमाल मोटे तौर पर सोशल मीडिया टूल्स में किया जाता है. यह ट्विटर पर अधिक लोकप्रिय है, लेकिन फ़ेसबुक समेत दूसरे प्लैटफ़ॉर्म पर भी इसका प्रयोग किया जा सकता है.

क्या था टूलकिट में?

दिशा रवि पर जो टूलकिट एडिट करने और दूसरों को भेजने के आरोप लगे हैं, उसमें क्या था, ये सवाल उठना लाज़िमी है. दिल्ली पुलिस ने इस टूलकिट को ‘विद्रोह पैदा करने वाला दस्तावेज’ बताया है और इसे तैयार करने वालों के ख़िलाफ़ धारा-124ए, 153ए, 153, 120बी के तहत मामला दर्ज किया है. दिल्ली पुलिस ने इस मामले में दिशा रवि को गिरफ़्तार किया है और शांतनु मुलुक और निकिता जेकब के ख़िलाफ़ वारंट जारी किया है.

लेकिन मुलुक और निकिता जेकब ने गिरफ़्तारी पर रोक लगाने की याचिका बंबई हाई कोर्ट में दायर की थी. टूलकिट में कहा गया था कि इसे इसलिए बनाया गया है कि जिन लोगों को भारत के किसान आन्दोलन के बारे में जानकारी नहीं है, उन्हें पता चल सके और वे इस बारे में फ़ैसला ले सकें कि उन्हें किसानों का किस तरह समर्थन करना है. टूलकिट में आगे कहा गया था कि ये हाशिए पर रहे किसान हैं, जिनका भारत की आज़ादी से पहले सामंती जमींदारों और औपनिवेशिक ताक़तों ने शोषण किया.

यह भी कहा गया था कि बाद में 1990 के बाद वैश्वीकरण और उदारीकरण की वजह से शोषण हुआ. टूलकिट में कहा गया था कि किसान आज भी भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और कर्ज के कारण हज़ारों आत्महत्याओं के बाद अब आए नए कृषि क़ानूनों ने उनकी मुसीबतों को और बढ़ा दिया है. कृषि क़ानूनों को बिना सोच-विचार किए ही पास कर दिया गया.

टूलकिट में आगे कहा गया है कि किसानों के समर्थन में हैशटैग #FarmersProtest और #StandWithFarmers लगाकर ट्वीट करें. इसके अलावा सरकार के किसी प्रतिनिधि को कॉल करें या ई-मेल करें और उनसे इसे लेकर क़दम उठाने को कहें. स्विस पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा तनबर्ग (थनबर्ग) ने पहले जो ट्वीट किया था, उसमें एक टूलकिट लगा था. उन्होंने बाद में टूलकिट हटा कर उसे फिर से ट्वीट किया और कहा था कि भारत के किसानों के साथ वे अब भी खड़ी हैं.

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