मोदी सरकार का स्पष्ट संदेश मिल चुका है, अब फैसला किसानों को करना है

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खुद प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा के तमाम नेताओं के साथ साथ है कृषि मंत्री भी कह चुके हैं कि, इस कृषि बिल को लागू करने से पहले बहुत विचार किया गया है, अचानक से लागू नहीं हुआ है. यह बात अलग है कि मोदी सरकार ने संसद के अंदर इस पर कोई बहस नहीं की, विपक्ष की राय नहीं ली है और पंजाब हरियाणा के साथ-साथ देश के किसी भी बड़े किसान संगठन से कोई परामर्श नहीं किया.

यह बात आरटीआई के जरिए भी सामने आई है कि, मोदी सरकार ने किसी भी किसान संगठन से कोई सलाह मशवरा नहीं किया. भाजपा के तमाम मंत्रियों और नेताओं के साथ-साथ प्रधानमंत्री मोदी खुद बार-बार यह कह रहे हैं कि यह कृषि बिल किसानों के हित में है. यह बात दीगर है कि वह कौन से किसान हैं जिनके हित में है.

क्योंकि सोशल मीडिया पर कई लोग मजाक में कह रहे हैं कि, अंबानी और अडानी दो ही किसान हैं जिनके लिए यह बिल बनाया गया है. किसान अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं कि, एमएसपी की गारंटी लिखित में दे सरकार और यह तीनों कृषि बिल वापस ले. सरकार बार-बार कह रही है कि हम बातचीत करने को तैयार हैं, संशोधन करने को तैयार हैं, लेकिन बिल वापस नहीं लिया जाएगा.

सरकार की नीयत साफ है, सरकार बिल वापस नहीं लेने जा रही है, चाहे इसके लिए किसान कितने भी दिन सड़कों पर आंदोलन करें, ठंड में रातें बिताएं. सरकार अपने आपको सर्वे सर्वा मानकर चल रही है. सरकार को देश की जनता ने प्रचंड बहुमत दिया है उस के दम पर सरकार लगातार देश की आवाज को अनसुना करती रही है. यह पहला मौका नहीं है.

सरकार के साथ आज किसानों की बातचीत होनी है. भाजपा के तमाम मंत्रियों नेताओं के साथ-साथ PM मोदी जिस तरीके से बिल के फायदे गिना रहे हैं, उससे साफ है कि किसानों के साथ बैठक में कुछ भी निष्कर्ष नहीं निकलने वाला है. सरकार बिल वापस लेगी नहीं और किसान बिल वापस करवाने पर अड़े हुए हैं.

चाहे शिरोमणि अकाली दल हो या फिर हनुमान बेनीवाल की पार्टी हो या इसके अलावा कई भाजपा के पूर्व सांसद विधायक हो, सब आखिर में इस कृषि बिल का विरोध कर रहे हैं. शिरोमणि अकाली दल और हनुमान बेनीवाल की पार्टी तो एनडीए का साथ तक छोड़ चुकी है. उसके बाद भी सरकार अपने फैसले पर अडिग है. गठबंधन के दलों के बिछड़ने के बाद भी अगर सरकार अपने फैसले पर अडिग है, तो संदेश साफ है कि सरकार बिल वापस नहीं लेगी.

अब किसानों को फैसला लेना है कि अगर सरकार यह बिल वापस नहीं लेती है, अपने फैसले पर अडिग रहती है और बातचीत करने का दिखावा करती रहती है तो आगे करना क्या है. विपक्ष आज की बातचीत करने के बाद सड़क पर उतरने के संकेत दे चुका है. आगे देखते हैं किसान आंदोलन और कितना लंबा चलता है और निष्कर्ष क्या निकलता है.

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