मोदी सरकार के ख़िलाफ़ लोगों में जबरदस्त ग़ुस्सा

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कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ दिल्ली के बॉर्डर्स पर चल रहे आंदोलन में आए दिन किसानों की मौत होने की ख़बर आ रही है. अब तक ऐसी ख़बरें सिंघु और टिकरी बॉर्डर से आती थीं लेकिन इस बार एक उम्रदराज़ किसान की मौत की दुखदायी ख़बर ग़ाज़ीपुर बॉर्डर से आयी है. 75 साल की उम्र के एक किसान ने आंदोलन स्थल पर आत्महत्या कर ली है.

किसान का नाम कश्मीर सिंह लाडी था और वह यूपी-उत्तराखंड के बॉर्डर पर पड़ने वाले बिलासपुर इलाक़े के रहने वाले थे. कश्मीर सिंह का शव टॉयलेट के अंदर मिला. भारतीय किसान यूनियन के मुताबिक़ कश्मीर सिंह ने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा है जिसमें उन्होंने आत्महत्या के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया है.

कश्मीर सिंह ने लिखा है, कब तक हम इस ठंड में बैठे रहेंगे। सरकार हमारी बात नहीं सुन रही है. इसलिए, मैं अपनी जान दे रहा हूं जिससे कोई रास्ता निकले. उन्होंने यह भी लिखा है कि उनके पोते आंदोलन स्थल पर ही उनका अंतिम संस्कार करें. पुलिस ने सुसाइड नोट को जब्त कर लिया है. कश्मीर सिंह के बेटे और पोते भी किसान आंदोलन में शिरकत कर रहे हैं.

किसान संगठनों का कहना है कि आंदोलन शुरू होने के बाद से अब तक 30 से ज़्यादा किसानों की मौत धरना स्थल पर हो चुकी है. इनमें से अधिकतर की मौत का कारण ठंड है जबकि कुछ लोगों ने आत्महत्या की है. हाड़ कंपाने वाली इस ठंड में जब लोग घरों में बैठकर गर्म खाना खा रहे हैं, गर्म कपड़े और रजाइयों के साथ हैं, ऐसे वक़्त में हज़ारों किसान, महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग दिल्ली के बॉर्डर्स पर धरने पर बैठे हैं.

दिल्ली-एनसीआर में रात के वक़्त पाला गिर रहा है और तापमान गिरकर 1-2 डिग्री तक पहुंच रहा है. ऐसे में किसान आख़िर खुले आसमान के नीचे कब तक बैठे रहेंगे और कब सरकार उनकी मांगों को मानेगी. किसानों का कहना है कि वे अपने हक़ की लड़ाई लड़ रहे हैं और तब तक नहीं जाएंगे जब तक ये कृषि क़ानून वापस नहीं हो जाते. उनका कहना है कि ये कृषि क़ानून उनके लिए डेथ वारंट हैं और इनके लागू होने से वे तबाह हो जाएंगे.

दिसंबर में सिंघु बॉर्डर पर सिख धर्म गुरू संत बाबा राम सिंह ने ख़ुदकुशी कर ली थी. तब भी किसानों और आम लोगों ने जबरदस्त आक्रोश का इजहार किया था. संत बाबा राम सिंह ने गोली मारकर आत्महत्या की थी. संत बाबा राम सिंह हरियाणा के करनाल के रहने वाले थे. उन्होंने सुसाइड नोट भी छोड़ा था. जिसमें लिखा था कि वह किसानों की बेहद ख़राब हालत के कारण यह आत्मघाती क़दम उठा रहे हैं. बड़ी संख्या में लोग संत बाबा राम सिंह के कीर्तन को सुनते थे.

पंजाब-हरियाणा और बाक़ी राज्यों से बड़ी संख्या में किसान आंदोलन में पहुंच रहे हैं. ग़ाज़ीपुर बॉर्डर के अलावा हरियाणा-राजस्थान की सीमा पर पड़ने वाले शाहजहांपुर-खेड़ी बॉर्डर पर भी किसान बड़ी संख्या में डटे हुए हैं. किसानों की लगातार हो रही मौत के कारण लोगों में जबरदस्त ग़ुस्सा है. उनका कहना है कि आख़िर सरकार को ये सब क्यों नहीं दिखाई दे रहा है. लोगों का कहना है कि आए दिन किसानों की मौत की ख़बर आ रही है लेकिन सरकार कृषि क़ानूनों को वापस लेने के बजाए सिर्फ बातचीत कर मामले को लटकाने में लगी है.

किसानों ने एक बार फिर मोदी सरकार को चेताया है कि वह उनकी मांगों को गंभीरता से ले और उन्हें तुरंत मान ले. किसानों और सरकार के बीच 4 जनवरी को अगले दौर की वार्ता होनी है. किसान नेताओं ने कहा है कि अगर यह वार्ता फ़ेल होती है तो वे अपना आंदोलन तेज़ करेंगे. किसानों ने कहा है कि वे 7 से 20 जनवरी तक पूरे देश में ‘देश जागृति अभियान’ चलाएंगे.

इसके साथ ही 18 जनवरी को महिला किसान दिवस और 23 जनवरी को सुभाष चंद्र बोस के जन्मदिन पर किसान चेतना दिवस मनाया जाएगा. उन्होंने कहा कि हरियाणा में टोल प्लाज़ा फ्री रहेंगे और सभी पेट्रोल पंप और मॉल्स बंद रहेंगे. किसानों ने कहा कि बीजेपी और जेजेपी के नेताओं का इनका गठबंधन बने रहने तक हरियाणा भर में विरोध जारी रहेगा. अंबानी-अडानी के प्रोडक्ट्स का बहिष्कार भी जारी रहेगा.

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