क्या हैं इस अप्रत्यासित घटना के राजनीतिक मायने?

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उत्तर प्रदेश की सियासत में ऐसी बड़ी घटना हुई, जो पिछले चार साल में नहीं हुई थी. ये घटना क्या है? वैसे तो सुनने में बहुत ही सामान्य लगती है. मंगलवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के घर गए. ये सुनने में बहुत ही सामान्य बात लगती है. कोई बड़ी बात नहीं लगती है.

दोनों साथ में काम करते हैं, इस लिहाज से एक-दूसरे के घरों में आना-जाना होना चाहिए. तब जबकि घर बिल्कुल नजदीक हो. लेकिन चार साल लग गए ये यात्रा करने में, यानी मुख्यमंत्री को अपने उपमुख्यमंत्री के घर जाने में. आज जब योगी आदित्यनाथ गए हैं तो अकेले नहीं गए. उनके साथ उनके दूसरे उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा थे. इसके अलावा आरएसएस के बड़े नेता भी उनके साथ थे.

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को अपने निवास से करीब 200 मीटर दूर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के घर गए. जाहिर तौर पर यह निजी मुलाकात थी. लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले एकजुट भाजपा दिखाने की कोशिश का एक निश्चित राजनीतिक संकेत जरूर दिखाई दे रहा है. भाजपा की ओर से जारी एक तस्वीर में नवविवाहित जोड़ा योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्य और उनकी पत्नी के साथ दिख रहा है. दूसरी में अन्य नेता जोड़े के साथ हैं और तीसरी तस्वीर में मौर्य मुख्यमंत्री को कुछ दे रहे हैं और दोनों इस मौके पर मुस्करा रहे हैं.

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लंच के ठीक बाद मुख्यमंत्री और उनके उप-मुख्यमंत्री लखनऊ में भाजपा दफ्तर में हो रही एक बैठक में चले गए. इस बैठक में दिल्ली से आए पार्टी के वरिष्ठ नेता बीएल संतोष और राधा मोहन सिंह भी शामिल थे. ये दोनों नेता पिछले कुछ सप्ताह से दूसरी बार लखनऊ में हैं. यूपी भाजपा प्रमुख स्वतंत्र देव सिंह भी बैठक में मौजूद थे. बैठक में कुछ मंत्रियों समेत पार्टी के करीब 20 वरिष्ठ नेता शामिल थे.

पिछले सप्ताह योगी आदित्यनाथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा प्रमुख जेपी नड्डा से मिलने दिल्ली भी गए थे. योगी आदित्यनाथ के खिलाफ पार्टी में असंतोष की ध्वनी देखने को मिली है. कई नेताओं ने निजी तौर पर कोविड संकट से निपटने और अपनी पार्टी के नेताओं के लिए भी उनकी अनुपलब्धता को लेकर चिंता जाहिर की थी. कईयों ने इस महामारी के संकट से निपटने की उनकी नीतियों को लेकर पत्र भी लिखे थे.

अप्रैल महीने में कानून मंत्री और पार्टी के प्रमुख ब्राह्मण चेहरा बृजेश पाठक का एक ‘गोपनीय’ पत्र सोशल मीडिया पर सामने आया था. इसमें उन्होंने राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों पर निशाना साधते हुए शिकायत की थी कि कोविड रोगियों के लिए बिस्तर बहुत कम थे और राज्य की राजधानी में भी एम्बुलेंस आने में घंटों लग जाते थे. मंत्री ने पत्र की प्रामाणिकता को खारिज नहीं किया.

लेकिन भाजपा स्पष्ट कर चुकी है पार्टी के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ही अगले साल विधानसभा चुनाव लड़ा जाएगा. पार्टी ने हालात सुधारने के लिए दूसरे रास्ते भी तलाशे जिनमें राज्य के कैबिनेट में फेरबदल और दूसरी पार्टियों से नेताओं को लाना भी शामिल हैं.

प्रधानमंत्री के करीबी पूर्व आईएएस अधिकारी एके शर्मा, जिन्हें राज्य की विधान परिषद के सदस्य के रूप में यूपी भेजा गया था को इस फेरबदल में मंत्री बनाने की चर्चा थी. लेकिन इसके बजाय उन्हें यूपी बीजेपी में उपाध्यक्ष बनाया गया. इसे बीजेपी हलकों में योगी आदित्यनाथ की जीत के रूप में देखा जा रहा है. पार्टी सूत्रों ने कहा है कि फिलहाल कोई फेरबदल नहीं होगा.

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