महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Uddhav Thackeray आखिर कर क्या रहे हैं?

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Uddhav Thackeray

शिवसेना (Shiv Sena) जब से बीजेपी से अलग हुई है और कांग्रेस तथा एनसीपी के साथ मिलकर गठबंधन की सरकार चला रही है, उसी वक्त से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) लगातार कुछ अलग हटकर करते जा रहे हैं.

उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray)

जिस वक्त उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) मुख्यमंत्री बने थे, उस वक्त उनको लेकर कई लोगों के मन में कुछ शंकाएं थी. उन्हें सरकार चलाने का अनुभव नहीं था. सरकार में पहले कभी शामिल नहीं हुए थे. सरकार में शामिल होकर कभी किसी मंत्रालय का प्रभार तक नहीं संभाला था.

लेकिन आज महाराष्ट्र मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) को देखकर, उनकी कार्यशैली की समीक्षा करके कोई यह नहीं कह सकता कि उद्धव ठाकरे पहली बार मुख्यमंत्री बने हैं. राजनीति के दांव पेच उद्धव ठाकरे बखूबी जानते थे पहले से ऐसा लगता है.

लंबे वक्त तक शिवसेना (Shiv Sena) बीजेपी के साथ गठबंधन में रही. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव शिवसेना ने बीजेपी के साथ मिलकर लड़ा, लेकिन विधानसभा चुनाव के बाद शिवसेना बीजेपी से अलग हो गई. शिवसेना ने बीजेपी पर धोखा देने का आरोप लगाया. उसके बाद महाराष्ट्र में महा विकास आघाडी की सरकार बनी.

शिव सेना की छवि कट्टर हिंदुत्व वाली पार्टी की थी. लेकिन जब से उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) मुख्यमंत्री बने हैं, शिवसेना की छवि में सुधार हुआ है. वह विरोधियों के लिए और भी अधिक आक्रामक हुए हैं और अपनी जनता के लिए और अपने समर्थकों के लिए उदार हुए हैं. शिवसेना एक सेक्युलर छवि वाली पार्टी में तब्दील हुई है उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में.

केंद्र की मोदी सरकार विरोधियों की आवाज को दबाने के लिए, उन्हें डराने के लिए सीबीआई ईडी जैसी संस्थाओं का इस्तेमाल खुलकर करती आई है. लेकिन जब से महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने हैं, मोदी सरकार की यह नीति शिवसेना ने कामयाब नहीं होने दी अपनी सरकार के खिलाफ. उद्धव ठाकरे ने विरोधियों को उन्हीं की भाषा में बखूबी जवाब दिया है जब से वह मुख्यमंत्री बने हैं.

सीबीआई और ईडी जैसी संस्थाओं का डर मोदी सरकार महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ नहीं दिखा पाई है. उद्धव ठाकरे या फिर उनके सरकार के खिलाफ गलत बयानबाजी करने वालों को उद्धव ठाकरे ने और उनकी सरकार ने आक्रामक होकर जवाब दिया है, नारायण राणे का केस इसी का उदाहरण है.

मोदी सरकार 2014 के बाद से ही कांग्रेस को और कांग्रेस के शासनकाल को बदनाम करके लगातार चुनाव जीतती आई है, लेकिन शिवसेना ने हमेशा पंडित नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी राजीव गांधी तथा मनमोहन सिंह तक के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों की प्रशंसा की है ऐसे प्रधानमंत्रियों की तारीफ की है.

एक आक्रमक छवि के साथ साथ खुद को और खुद की पार्टी को सेक्युलर छवि में तब्दील बखूबी किया है उद्धव ठाकरे ने और शिवसेना ने. यह आने वाले समय में शिवसेना के लिए भी अच्छे संकेत हैं. 2024 में शिवसेना अगर कांग्रेस के साथ मिलकर पूरे देश में बीजेपी के खिलाफ चुनाव प्रचार करती है तो बीजेपी को बड़े स्तर पर इसका नुकसान हो सकता है.

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