क्यों खड़े हो रहे हैं महाराज सिंधिया को लेकर सवाल?

0
Jyotiraditya Scindia

कांग्रेस पर उपेक्षा का आरोप लगाकर ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में शामिल हो गए थे. जब ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में शामिल हुए थे तो, उनके भोपाल में पहले भव्य स्वागत को अगर याद किया जाए तो लगता था कि भाजपा उन्हें सिर आंखों पर बैठाएगी.

लेकिन अब आलम कुछ अलग ही है. दिल्ली से लेकर भोपाल तक अब सिंधिया और उनके समर्थकों की उपेक्षा को आसानी से समझा भी जा सकता है और महसूस भी किया जा सकता है. सिंधिया और उनके समर्थक अब कहीं ना कहीं अपनी नई पार्टी यानी भाजपा में भी उपेक्षित नजर आ रहे हैं.

2019 में जनता के बहुमत से बनी कमलनाथ सरकार में सिंधिया और बीजेपी की हमेशा से शिकायत रही कि पार्टी में उनकी अनदेखी लगातार की जा रही है. फिर सिंधिया ने अपना राजनीतिक दबदबा कायम रखने के लिए बीजेपी ज्वाइन कर ली. और इसी बहाने शिवराज सरकार की ताजपोशी हुई. लेकिन हालात ज्यों के त्यों है.

10 महीने की शिवराज सरकार में कुछ ऐसी बातें सामने आई जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि हाल ही में बीजेपी के भीतर सिंधिया की सुनवाई में थोड़ी बहुत कमी आई है. भाजपा ज्वाइन करने के बाद से अभी तक केंद्रीय मंत्री नहीं बन पाए हैं ज्योतिरादित्य सिंधिया. जबकि उनके केंद्रीय मंत्री बनने के मसले को दलबदल की प्रमुख शर्त माना जा रहा था.

इसके अलावा सिंधिया के समर्थकों को भी सरकार और संगठन में उपेक्षित किया जा रहा है. सिंधिया समर्थकों को कार्यकारिणी में एडजस्ट करना बड़ी चुनौती है. उपचुनाव के नतीजों के बाद से अभी तक गोविंद सिंह और तुलसी सिलावट कैबिनेट से बाहर है. हारे हुए सिंधिया समर्थकों को भी निगम मंडल देने में बीजेपी कोई रुचि नहीं दिखा पा रही है.

आयकर विभाग की कार्रवाई में भी सिंधिया के समर्थकों के उलझने से अटकले बढ़ी हैं. कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि जिन मुद्दों को लेकर बीजेपी लगातार घेरती थी रहती थी, अब सिंधिया की स्थिति को लेकर कांग्रेस भी तंज कस रही है. इस वक्त देखा जाए तो मध्य प्रदेश के साथ-साथ दिल्ली की राजनीति में भी ज्योतिरादित्य सिंधिया कहीं ना कहीं उपेक्षा के साथ जूझ रहे हैं. हालांकि कांग्रेस और भाजपा इसे लेकर अलग-अलग दावे कर रही हैं.

कहा जाता है कि राजनीति में सब जायज है. और राजनीतिक रसूख बनाए रखने के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भाजपा ज्वाइन की थी. इस बात से भी कोई इनकार नहीं कर सकता कि दलबदल करके ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक बड़ा जुआ खेला था.

हालांकि उससे कांग्रेस को नुकसान हुआ था और ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस की सरकार गिराने में कामयाब हो गए थे. और उपचुनाव में भी सिंधिया बीजेपी को जीत दिलाने में कामयाब हुए हैं. लेकिन इस मामले से जुड़े नकारात्मक पहलुओं को भी दरकिनार नहीं कर सकते जो अलग-अलग भेष में सामने आ रहे हैं.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here