चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के ट्वीट पर बहस क्यों?

0
PRSHANT-KISHOR

प्रशांत किशोर पूरे बिहार चुनाव से गायब रहने के बाद बंगाल में लगातार ममता बनर्जी को फिर मुख्यमंत्री बनाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं. प्रशांत किशोर के कुछ फैसलों को लेकर ममता बनर्जी की पार्टी में पिछले दिनों विरोध भी हुआ था. लेकिन ममता बनर्जी को प्रशांत किशोर पर भरोसा है.

भारतीय जनता पार्टी बंगाल मे विधानसभा चुनाव के बाद सरकार बनाने के प्रयास में लगी हुई है. भाजपा के बड़े से बड़े नेता और केंद्रीय मंत्री आए दिन बंगाल में डेरा जमाए हुए हैं. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी लगातार बंगाल के दौरे कर रहे हैं और आने वाले विधानसभा चुनाव में जीत के दावे कर रहे हैं. इसी तरह बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा भी लगातार बंगाल के दौरे कर संगठन को मजबूत कर के चुनावी रणनीति बनाने में लगे हुए हैं.

इन सबके बीच प्रशांत किशोर ने एक ट्वीट किया है. प्रशांत किशोर का कहना है कि भाजपा समर्थित मीडिया के एक धड़े द्वारा राजनीतिक हवा बनाई जा रही है. हकीकत में, बीजेपी को पश्चिम बंगाल में दहाई अंक से सीटें पार करने में ही संघर्ष करना पड़ेगा. प्रशांत किशोर यहीं नहीं रुके. उन्होंने आगे कहा, इस ट्वीट को सेव कर लीजिए और यदि बीजेपी इससे अच्छा प्रदर्शन करती है तो मैं यह काम छोड़ दूंगा. प्रशांत किशोर को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है.

कुछ लोगों का कहना है कि प्रशांत किशोर ट्विटर छोड़ देंगे, कुछ लोगों का कहना है कि राजनीति. प्रशांत किशोर राजनीतिक रणनीतिकार हैं वह छोड़ेंगे भी तो राजनीतिक पार्टियों के लिए रणनीति बनाना बंद करेंगे. हालांकि यह अभी क्लियर नहीं है कि राजनीतिक पार्टियों के लिए काम करना बंद करेंगे या फिर ट्विटर छोड़ेंगे. लेकिन प्रशांत किशोर के ट्वीट से एक नई बहस सोशल मीडिया पर जरूर छिड़ गई है.

लगातार देखने को मिल रहा है कि भाजपा भारतीय मीडिया के जरिए बंगाल को लेकर अभी से माहौल तैयार करने में लगी हुई है. मीडिया, भाजपा की बंगाल को लेकर रणनीति पर हद से ज्यादा तवज्जो दे रही है. एक छोटी सी छोटी घटना जो भाजपा से या भाजपा के नेताओं से जुड़ी हुई है, उसको मीडिया लगातार कवरेज दे रही है. भाजपा बंगाल में अगर माहौल थोड़ा बहुत बना पाई है उसमें भारतीय मीडिया का भी अहम रोल है.

बात अगर प्रशांत किशोर कि की जाए तो, प्रशांत किशोर अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के लिए चुनावी रणनीति बनाने का काम करते हैं और उनसे पैसा भी लेते हैं. प्रशांत किशोर मतलब चुनावी जीत की गारंटी नहीं है. प्रशांत किशोर ने 2014 से पहले बीजेपी के लिए रणनीतिकार के तौर पर काम किया था और भाजपा को प्रचंड जीत मिली थी. लेकिन इसका श्रेय प्रशांत किशोर को नहीं दिया जा सकता. क्योंकि बीजेपी की जीत में अन्ना हजारे के आंदोलन और मीडिया ने प्रमुख भूमिका निभाई थी. जिसके कारण गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने थे.

केजरीवाल के लिए भी इस बार चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने काम किया था. लेकिन आम आदमी पार्टी की सीटें पिछली बार के मुकाबले घटकर 63 हो गई थी. बिहार चुनाव से पहले भी प्रशांत किशोर ने अलग ही माहौल बनाया था. लेकिन बिहार विधानसभा चुनाव आते-आते प्रशांत किशोर गायब हो गए थे. इसलिए बंगाल को लेकर उनकी रणनीति पर भरोसा करना और उनके दावों पर भरोसा करना ममता बनर्जी के लिए भी और जनता के लिए भी घातक है.

बंगाल में भाजपा तृणमूल कांग्रेस के बागी नेताओं के भरोसे और गोदी मीडिया के भरोसे चुनाव में उतरने की रणनीति पर काम कर रही है. दूसरी तरफ ममता बनर्जी को खुद पर और खुद की पार्टी पर, खुद की सरकार द्वारा बंगाल की जनता के लिए किए गए कामों के दम पर चुनाव में उतरना होगा.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here