ग़ाज़ीपुर, सिंघु बॉर्डर पर पुलिस की जबरदस्त तैनाती क्यों?

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कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ हुंकार भर रहे आंदोलनकारी किसान जिन बॉर्डर्स पर बैठे हैं, वहां इन दिनों बड़ी संख्या में पुलिस बल को तैनात करने, कंक्रीट की दीवार बनाने सहित कई क़दम उठाए जा रहे हैं. ग़ाज़ीपुर और सिंघु बॉर्डर पर बैठे किसानों में इसे लेकर डर का माहौल है.

दिल्ली पुलिस ने रविवार से सिंघु बॉर्डर पर बाहर से आने वालों की एंट्री रोक दी है. शुक्रवार को स्थानीय लोगों ने इस बॉर्डर को खाली कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था, तब आंदोलनकारी किसानों और स्थानीय लोगों के बीच झड़प हुई थी. इसके बाद से पुलिस ने यह फ़ैसला लिया है कि किसी भी शख़्स को धरनास्थल पर नहीं जाने दिया जाएगा. धरना स्थल पर चल रहे लंगरों में सेवा करने के लिए बाहर से आने वालों को भी अंदर जाने नहीं दिया जा रहा है.

इन दोनों जगहों को किसी छावनी में तब्दील कर दिया गया है और यहां कई लेयर्स की बैरिकेडिंग की गई है. पुलिस का कहना है कि झड़प के बाद ही उन्हें सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ऐसा करना पड़ा. सिंघु बॉर्डर पर सुरक्षा बलों की 50 कंपनियां लगाई गई हैं. ‘द हिंदू’ के मुताबिक़, दिल्ली की ओर से आने वाले लोगों को धरना स्थल से 2 किमी पहले ही रोक दिया जा रहा है. मीडियाकर्मियों को भी अंदर जाने में ख़ासी मुश्किल हो रही है.

ऐसा लगता है कि पुलिस ने सिंघु और ग़ाज़ीपुर बॉर्डर को पूरी तरह दिल्ली से काट दिया है. इससे सबसे ज़्यादा दिक़्कत वहां तक खाने-पीने का सामान पहुंचाने वालों को हो रही है. हालांकि पुलिस का कहना है कि ज़रूरी चीजों को सिंघु बॉर्डर तक वैकल्पिक रास्तों के जरिये पहुंचाया जा रहा है. संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि ऐसा ज़रूरी चीजों- खाने और पानी को लोगों तक पहुंचने से रोकने के लिए किया जा रहा है.

पिछले दो महीने से दिल्ली और हरियाणा के बीच आने-जाने वाले लोग जिस परेशानी से गुजर रहे थे, अब ये और ज़्यादा बढ़ गई है. दिल्ली के पुलिसकर्मियों को अपने बचाव के लिए स्टील की लाठियां दी गई हैं. ये लाठियां इस तरह की हैं कि पुलिसकर्मियों के हाथ जख्मी होने से बचे रहें. बीते सप्ताह सिंघु बॉर्डर पर एक किसान ने अलीपुर थाने के एसएचओ पर तलवार से हमला कर दिया था. उसके बाद दिल्ली पुलिस के जवानों को ये लाठियां उपलब्ध कराई गई हैं.

किसानों के प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली के सिंघु, टिकरी और ग़ाज़ीपुर बॉर्डर्स पर इंटरनेट सेवाएं बीते कुछ दिनों से बंद हैं. इस बीच, केंद्र सरकार ने इंटरनेट सेवाओं के निलंबन को 2 फ़रवरी तक के लिए बढ़ा दिया है. सरकार का कहना है कि ऐसा सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए किया गया है. किसानों ने इंटरनेट बंद किए जाने पर नाराजगी जताई है. क्रांतिकारी किसान यूनियन के नेता दर्शन पाल ने सरकार को चेतावनी दी है कि वह इंटरनेट सेवा को तुरंत चालू करे वरना किसान इसके ख़िलाफ़ देश भर में प्रदर्शन करेंगे.

हरियाणा सरकार ने भी कई जिलों में इंटरनेट सेवाओं को रोका था. 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा के बाद भी केंद्र सरकार ने दिल्ली के बॉर्डर्स पर पड़ने वाले इलाक़ों में इंटरनेट सेवा को बंद कर दिया था. संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि यह उनकी आवाज़ को दुनिया तक पहुंचने से रोकने की कोशिश है.

सियासत पर भी असर

किसान आंदोलन के कारण हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत पर ख़ासा असर हो रहा है. किसानों के इन क़ानूनों के पुरजोर विरोध करने के कारण पंजाब में शिरोमणि अकाली दल और राजस्थान में हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी को एनडीए छोड़ना पड़ा. हरियाणा में बीजेपी के साथ सरकार चला रही जेजेपी पर जबरदस्त दबाव है कि वह सरकार से बाहर निकल आए. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सभी विपक्षी दलों के किसानों के समर्थन में उतरने से बीजेपी नेताओं और योगी सरकार में खलबली है.

किसानों के अलावा जाट समुदाय के लोग भी इस आंदोलन में एकजुट होते दिख रहे हैं. किसान नेता राकेश टिकैत के भावुक होने वाले वीडियो के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में महापंचायतें हो रही हैं और इनमें खासी भीड़ उमड़ रही है. ऐसे में इस आंदोलन से प्रभावित राज्यों के साथ ही केंद्र सरकार के सामने भी इसे संभाल पाना बड़ी चुनौती बन गया है. इस बीच, सिंघु, टिकरी और ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर किसानों का आना जारी है. सिंघु बॉर्डर पर जहां पंजाब से बड़ी संख्या में किसान आ रहे हैं, वहीं टिकरी बॉर्डर पर हरियाणा से और ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश से.

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