तालिबान (Taliban) वाली पूरी शतरंज डोनाल्ड ट्रंप की बिछाई हुई है?

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Taliban-Donald Trump

अफगानिस्तान में आज चारों तरफ अफरा-तफरी मची हुई है, इसकी वजह सिर्फ और सिर्फ अफगानिस्तान के अंदर है तालिबान (Taliban) के कब्जे को माना जा रहा है. तालिबान के पिछले शासन को लोग भूले नहीं है.

हालांकि तालिबान बार-बार यह दोहरा रहा है कि उसके शासन में जनता सुरक्षित है. अफगानिस्तान के अंदर हिंदू और सिख भी सुरक्षित रहेंगे. लेकिन तालिबान के इतिहास को देखा जाए तो उसकी बातों पर भरोसा करना खुद को धोखा देने जैसा होगा.

तालिबान जो दुनिया के सामने वादे करता है उसको कभी अमल में नहीं लाता, यही तालिबान का इतिहास रहा है. तालिबान शरिया कानून के तहत शासन करता है. औरतों की आजादी छीन ली जाती है. आवाम पर जुल्म करना तालिबान अपना अधिकार समझता है.

तालिबान (Taliban) से क्यों डरे हुए हैं लोग?

तालिबान के शासन में लोगों की आजादी छीन ली जाती है. तालिबान का पिछला शासन अफगानिस्तान की जनता ने भी देखा है और दुनिया ने भी देखा है, जिसमें तालिबान ने कत्लेआम मचाया था और अभी भी ऐसा ही होता हुआ दिखाई दे रहा है.

तालिबान के शासन में सार्वजनिक तौर पर सजा-ए-मौत देना, हाथ पैर काट देना, कला संगीत पर प्रतिबंध. टेलीविजन देखने पर रोक और दाढ़ी नहीं रखने वालों या फिर पूरे दिन में 5 बार नमाज नहीं पढ़ने वालों की पिटाई वगैरा भी शामिल है.

पिछली बार तालिबान के शासन में महिलाओं को शिक्षा और नौकरी की इजाजत नहीं थी. वह घर पर ही रहने को मजबूर थी. जो लड़कियां 8 साल से ऊपर की हैं इसके अलावा महिलाओं को बुर्का पहनना अनिवार्य कर दिया गया था, वह घर के किसी पुरुष के साथ ही घर के बाहर जा सकती थी अकेले नहीं.

अफगानिस्तान के मौजूदा हालात के लिए डोनाल्ड ट्रंप जिम्मेदार

अब फिर से अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा हो गया है और तालिबान सरकार बनाने जा रहा है. इससे अफगानिस्तान के लोग डरे हुए हैं. दुनिया भी अफगानिस्तान पर नजरें टिकाए हुए हैं. अमेरिकी सेना की वापसी के बाद लोग अफगानिस्तान के हालात के लिए अमेरिका को दोष दे रहे हैं.

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने भी अफगानिस्तान के मुद्दे पर कई बयान दिए थे और अभी भी दे रहे हैं. अभी वह कह रहे हैं कि क्या अभी भी उन्हें याद किया जा रहा है? कई लोगों का कहना है कि आज डोनाल्ड ट्रंप होते तो अफगानिस्तान की स्थिति ऐसी नहीं होती. जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है.

आज अफगानिस्तान की जो भी स्थिति है उसके लिए डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ही जिम्मेदार हैं. क्योंकि मुल्ला बेरादर जेल में था. 2018 में ट्रंप ने उसे रिहा कराया. गुड तालिबान बैड तालिबान का जुमला ट्रंप ने उछाला. ट्रंप के विदेश मंत्री ने 2020 में मुल्ला बेरादर से समझौता किया.

आज कुछ लोग कह रहे हैं कि ट्रंप होते तो तालिबान (Taliban) काबुल में नहीं घुसता.

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