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नामीबिया से लाए गए 8 चीतों को 17 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी ने मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क को सौंप दिया. नामीबिया से 9000 किलोमीटर का सफर करके उनको लाया गया. इस बीच देश के तमाम मुद्दे मीडिया से गायब दिखाई दिए. चारों तरफ सिर्फ इन्हीं चीतों का शोर सुनाई दिया. हैरानी की बात यह है कि इन चीतों की पल-पल की खबर मीडिया में दिखाई गई. कैसे बोलते हैं, कैसे दौड़ते हैं, कितनी रफ्तार में कितनी दूरी तय करते हैं सब कुछ मीडिया के द्वारा बताया गया और इस पर तमाम चैनलों ने घंटों तक प्रोग्राम किया और डिबेट कराई.

मीडिया चैनलों में इसको लेकर जो खबरें दिखाई गई उनको देखकर ऐसा लग रहा था कि देश में इस वक्त कोई समस्या नहीं है. जबकि दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर आज प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिवस पर बेरोजगार दिवस ट्रेंड कर रहा था. लेकिन मीडिया में इसको लेकर कोई खबर नहीं थी. बेरोजगार युवाओं की मांग को लेकर कोई डिबेट नहीं हुई. चारों तरफ सिर्फ और सिर्फ नामीबिया से लाए गए चीतों की खबरें दिखाई गई.

जैसा कि हर बार देखने को मिलता है छोटी से छोटी चीज को भी बड़े इवेंट की तरह प्रधानमंत्री मोदी प्रस्तुत करते हैं और उसको मीडिया आगे बढ़ाती है. ठीक ऐसा ही इस बार भी देखने को मिला. प्रधानमंत्री मोदी ने पिछली सरकारों का इस मौके पर मजाक भी उड़ाया. उन्होंने कहा कि पहले कबूतर छोड़े जाते थे और हम चीते छोड़ रहे हैं फर्क साफ है.

तमाम मीडिया चैनलों पर और अखबारों में नामीबिया से लाए गए चीतों का महिमामंडन देखने को मिल रहा है और इसकी आड़ में प्रधानमंत्री मोदी का प्रचार-प्रसार हो रहा है और इन सब के पीछे देश के ज्वलंत मुद्दों को दबाया जा रहा है. देश में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या का रूप लेती जा रही है, इसको लेकर आज युवाओं ने सोशल मीडिया पर बेरोजगार दिवस ट्रेंड कराया और मीडिया ने इन युवाओं की आवाज को अपने प्लेटफार्म पर जगह नहीं दी. शायद इससे प्रधानमंत्री मोदी द्वारा किए जा रहे इवेंट इवेंट में खलल दिखाई दे सकती थी. इसलिए मीडिया ने युवाओं की आवाज को दरकिनार किया.

नामीबिया से लाए गए चीतों की आड़ में प्रधानमंत्री मोदी का महिमामंडन किया जा रहा है मीडिया चैनलों पर और ऐसा दिखाया जा रहा है जैसे देश में सचमुच अच्छे दिन आ गए हैं, बेरोजगारी की समस्या नहीं है, कुपोषण की समस्या देश से विलुप्त हो चुकी है, किसानों की समस्याओं का समाधान हो चुका है, महंगाई की समस्या को सरकार ने कंट्रोल कर लिया है और उसके बाद सरकार जश्न मना रही है. मीडिया जिस तरीके से व्यवहार कर रहा है उससे साफ है कि मीडिया देश की जनता की आवाज बनने की जगह सरकार का भोपू बन चुका है.

इस वक्त कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा कर रहे हैं, लेकिन उनकी यात्रा को मीडिया अपने प्लेटफार्म पर उतनी जगह नहीं दे रहा है जितना विपक्ष के एक बड़े नेता को देना चाहिए. इसकी जगह उनकी यात्रा की कमियों पर मीडिया पिछले दिनों डिबेट कराता हुआ दिखाई दिया और आज जिस मुद्दे से देश की जनता का लेना देना ही नहीं है उस पर पूरे दिन इवेंट की तरह खबरें चलाई गई मीडिया चैनलों पर.

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