Rahul Gandhi

2019 के लोकसभा चुनाव के बाद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था, उसके बाद से ही कांग्रेस अध्यक्ष की तलाश चल रही है. हालांकि सोनिया गांधी कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष बनी हुई हैं. उदयपुर में हुए चिंतन शिविर में कहा गया था कि सितंबर तक यह तलाश पूरी हो जाएगी, लेकिन यह तलाश खत्म होती हुई अभी नजर नहीं आ रही है. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को जयपुर में कहा कि, अगर राहुल गांधी पार्टी अध्यक्ष नहीं बनते हैं तो देश भर के कांग्रेस कार्यकर्ता निराश होंगे. कार्यकर्ताओं की भावनाओं को समझते हुए उन्हें अध्यक्ष पद स्वीकार कर लेना चाहिए.

ज्यादातर कांग्रेस के बड़े नेता राहुल गांधी के नाम पर अटके हुए हैं और राहुल गांधी अध्यक्ष पद स्वीकार करने के लिए तैयार दिखाई नहीं दे रहे हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि राहुल गांधी अध्यक्ष पद स्वीकार करने में हिचक क्यों रहे हैं? क्या इसके पीछे कई कारण हैं? राहुल गांधी ने 2019 लोकसभा चुनावों में हार की जिम्मेदारी लेते हुए अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था और उस वक्त उन्होंने कुछ मुद्दे उठाए थे. उस चिट्ठी में उन्होंने एक जगह लिखा था कि इस प्रक्रिया के लिए, पार्टी के विस्तार के लिए लोकसभा चुनाव की हार की जिम्मेदारी तय की जाने की जरूरत है. इसके लिए बहुत सारे लोग जिम्मेदार हैं. लेकिन अध्यक्ष पद पर रहते हुए मैं जिम्मेदारी ना लूं और दूसरों को जिम्मेदार बताऊं, यह सही नहीं होगा.

राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा देते वक्त जो मुद्दे उठाए थे उससे साफ था कि उनके इस्तीफे के बाद राहुल चाह रहे थे कि उनके अलावा कई और जिम्मेदार पद पर बैठे लोग भी इस्तीफा दें. लेकिन उनके अलावा कांग्रेस में और किसी बड़े नेता ने इस्तीफा नहीं दिया. राहुल गांधी ने कहा था कि मैं व्यक्तिगत तौर पर सीधे प्रधानमंत्री R.S.S. और उन तमाम संस्थाओं के साथ जिस पर उन्होंने कब्जा कर लिया है, अपने पूरे जज्बे के साथ लड़ा. राहुल गांधी ने राफेल घोटाले की बात जोर शोर से उठाई थी. “चौकीदार चोर है” को चुनाव में मुद्दा बनाया था. इन मुद्दों पर उन्हें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का उस तरह से साथ नहीं मिला जैसा मिलना चाहिए था.

राहुल गांधी के अलावा 2019 के लोकसभा चुनाव की हार की जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली और किसी ने भी अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया ऐसा लग रहा है कि अभी भी राहुल गांधी के मन में वह बात खटक रही है जिस पार्टी में बड़े नेताओं को उनकी जिम्मेदारी का एहसास तक ना हो शायद वह से नेताओं की पार्टी का नेतृत्व राहुल गांधी नहीं करना चाहते हैं. कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देते हुए राहुल गांधी ने कहा था कि, वह चाहते हैं कि कांग्रेस का अगला अध्यक्ष चुनावों से तय किया जाए और इस वजह से जाते जाते वह किसी का नाम इस पद के लिए आगे नहीं लिख रहे हैं. वह चाहते थे कि गैर गांधी कांग्रेस का अध्यक्ष बने.

2019 के लोकसभा चुनावों की हार के बाद, इस्तीफा देने के बाद अभी तक राहुल गांधी का स्टैंड नहीं बदला है. कम से कम सार्वजनिक मंच से उनका इस पद के लिए कोई बयान नहीं आया है. इस वजह से अगर राहुल गांधी दोबारा से अध्यक्ष पद स्वीकार कर लेते हैं तो उनकी कथनी और करनी में अंतर के तौर पर भी इसे लोग देख सकते हैं. शायद यह भी उनके दिमाग में होगा. बीजेपी परिवारवाद का मुद्दा उठाती है, राहुल गांधी अध्यक्ष पद स्वीकार कर बीजेपी को दोबारा से एक बना बनाया मुद्दा नहीं देना चाहते होंगे.

हालांकि कांग्रेस के तमाम बड़े नेता अभी भी राहुल गांधी को मनाने में जुटे हुए हैं. मीडिया में तमाम तरह की खबरें हैं गैर गांधी को अध्यक्ष बनाने को लेकर, लेकिन यह आने वाले वक्त में पता चलेगा कि क्या राहुल गांधी अध्यक्ष पद स्वीकार करते हैं या फिर वह बिना किसी पद के कांग्रेस संगठन के लिए काम करेंगे. हालांकि कांग्रेस के अंदर की एक सच्चाई यह भी है कि राहुल गांधी अध्यक्ष बने या ना बने, तमाम फैसलों में उनका दखल दिखाई देता है. इसीलिए भी कार्यकर्ता और नेता चाहते हैं कि राहुल गांधी ही कांग्रेस के अध्यक्ष पद की कमान संभाले.

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