Bharat Jodo Yatra

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने 7 सितंबर को तमिलनाडु के कन्याकुमारी से भारत जोड़ो यात्रा (Bharat Jodo Yatra) की शुरुआत कर दी है. यह यात्रा देश के 12 राज्यों से होते हुए गुजरेगी और लगभग 3570 किलोमीटर की दूरी तय करेगी. कांग्रेस को तथा तमाम सिविल सोसाइटी से जुड़े हुए लोगों को उम्मीद है कि इस यात्रा के जरिए वह देश में बढ़ती हुई नफरत को खत्म करके लोगों को आपस में जोड़ सकेंगे. इसके साथ-साथ कांग्रेस को यह भी उम्मीद है कि 2024 के चुनाव से पहले संगठन में जान आएगी.

कांग्रेस को उम्मीद है कि देश के ज्वलंत मुद्दों पर वह मोदी सरकार को बैकफुट पर धकेलने में कामयाब होगी. भारत जोड़ो यात्रा निकालने की योजना इस साल जून में उदयपुर में हुए कांग्रेस के चिंतन शिविर के जरिए निकल कर आई थी. 5 महीने में पूरी होने वाली इस यात्रा में पार्टी के 100 से ज्यादा नेता शामिल हैं. यात्रा में शामिल होने वाले लोगों में से अधिकतर 30 से 40 साल की उम्र के हैं.

जितने बड़े पैमाने पर राहुल गांधी ने यह यात्रा निकाली है, हाल के दिनों में किसी राजनेता द्वारा ऐसी यात्रा नहीं निकाली गई है. ऐसी पद यात्राएं कई राज्यों के छत्रप निकालते रहे हैं, अपने वोट बैंक को और पार्टी को मजबूत करने के लिए. लेकिन पूरे देश में ऐसी यात्रा पिछले तीन दशक में देखने को नहीं मिली है. देश के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने 1983 में पदयात्रा की थी. उन्होंने इस यात्रा को भारत यात्रा नाम लिया था. उनकी यात्रा 4000 किलोमीटर से अधिक की थी. राहुल गांधी ने इस यात्रा के जरिए एक बड़ी लकीर खींचने की कोशिश की है.

अब आने वाले दिनों में देखने को मिलेगा कि यह यात्रा देश के लोगों के बीच एक उम्मीद जगा पाती है या नहीं. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा है कि अब पार्टी पहले से ज्यादा आक्रामक होगी. इससे मित्र दल एवं विपक्षी दल उसे हल्के में नहीं ले सकेंगे. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि भाजपा इससे परेशान है. उन्होंने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी इस यात्रा को लेकर जिस तरह से हमले कर रही है, उससे स्पष्ट है कि वह इस यात्रा से परेशान है.

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