Surya Pratap Singh Social media

मोदी सरकार द्वारा लाए गए तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ देश के किसान लंबे समय से अलग-अलग जगहों पर आंदोलन कर रहे थे. तथा मोदी सरकार से मांग कर रहे थे कि कृषि को लेकर यह कानून किसानों को नहीं चाहिए, इसे वापस लिया जाए. लेकिन मोदी सरकार किसानों की मांगों को मानने के लिए तैयार नहीं थी.

किसानों की मांगों को मानने की बजाय किसानों को गलत तरीके से बदनाम करने की साजिश मीडिया के माध्यम से रची गई, ऐसा पूरे देश ने देखा. बीजेपी के कई बड़े नेताओं ने किसानों के बारे में गलत बयान बाजी की. मीडिया का एक पूरा वर्ग किसानों को बदनाम करने के लिए तैयार बैठा रहता था.

तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग किसानों के साथ-साथ विपक्ष कर रहा था. लेकिन मोदी सरकार किसानों की मांगों को तथा विपक्ष की आवाज को सुनने के लिए तैयार नहीं थी. राहुल गांधी ने इन कानूनों के खिलाफ ट्रैक्टर रैली निकाली थी उसके बाद किसान आंदोलन की शुरुआत हुई थी.

अब कुछ ही वक्त बाद उत्तर प्रदेश सहित दूसरे राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और किसान आंदोलन का असर विधानसभा चुनाव पर पड़ सकता है, ऐसा बीजेपी को आभास हो चुका था. ऐसा लगता है चुनावी हार से बचने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान कर दिया है, माफी मांगते हुए.

तीनों कृषि कानूनों की वापसी के बाद रिटायर्ड आईएएस सूर्य प्रताप सिंह (Surya Pratap Singh) ने एक ट्वीट किया है उन्होंने लिखा है कि, 700 किसानों ने बलिदान दिया! कभी उन्हें खलिस्तानी तो कभी आतंकवादी कहा गया. पर जब उपचुनाव में ‘वोट की चोट’ मिली तो सबसे बड़े तानाशाह ने भी घुटने टेक दिए. संसद में यूपी से अखिलेश, हरियाणा से दीपेंदर हुड्डा, दिल्ली से संजय सिंह और विपक्षी दल के नेता राहुल गांधी को ढेरों साधुवाद.

बता दें कि उत्तर प्रदेश का विधान सभा चुनाव बीजेपी के लिए आसान नहीं होने वाला है. खासतौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान बीजेपी से खासे नाराज बताए जा रहे हैं. तीनों कृषि कानूनों के अलावा उनकी अन्य मांगों को भी बीजेपी ने नजरअंदाज किया है, जिसका खामियाजा बीजेपी को विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है.

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