Kanhaiya Kumar 800

इस वक्त देश में कई तरह की बहस एक साथ छिड़ी हुई है. मीडिया का पूरा 1 वर्ग सवालों के घेरे में है. कहा जा रहा है कि मीडिया अपना काम सही ढंग से नहीं कर रहा है. यह भी कहा जा रहा है कि, मीडिया इस वक्त मौजूदा सत्ता के सामने नतमस्तक है.

प्रधानमंत्री चुनावी रैलियों में और अपने भाषणों में खुद को फकीर बताते हैं. कुछ ही महीनों बाद पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. लेकिन सबसे अधिक किसी राज्य पर सबकी नजरें टिकी हुई है तो वह उत्तर प्रदेश है और उत्तर प्रदेश जीतने के लिए बीजेपी जी-जान से जुटी हुई है.

उत्तर प्रदेश जीतने के लिए केंद्र की पूरी सरकार लगी हुई है. प्रधानमंत्री मोदी इस वक्त बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर के जरिए उत्तर प्रदेश का किला फतह करने की कोशिश कर रहे हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी लगातार अपने बयानों के जरिए विरोधियों पर निशाना साध कर जनता को अपनी तरफ करने की कोशिशों में लगे हुए हैं.

बीजेपी का प्रचार तंत्र इस वक्त ऐसा लग रहा है कि मीडिया के हाथों में है. समाचार चैनलों पर और अखबारों में सिर्फ और सिर्फ बीजेपी दिखाई दे रही है, प्रधानमंत्री मोदी दिखाई दे रहे हैं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिखाई दे रहे हैं.

इस बीच कन्हैया कुमार (Kanhaiya Kumar) ने एक ट्वीट किया है. जिसमें उन्होंने दरबारी शब्द का इस्तेमाल किया है. अब दरबारी किसके लिए लिखा गया है यह कयास लगाए जा रहे हैं उन्होंने लिखा है कि, इस दौर के दरबारियों ने चापलूसी की एक निराली अभिव्यक्ति प्रस्तुत की है. बड़ी चालाकी से मक्कारी को फ़क़ीरी, भोगी को योगी, शृंगार को सादगी, बर्बादी को बुलंदी, बुराई को अच्छाई, दंगाई को देशप्रेमी और गोडसे को गांधी के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया है.

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