Uddhav Thackeray news-23

शिवसेना में लंबे वक्त से उथल-पुथल मची हुई है. अब मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का खेमा शिवसेना के भीतर मजबूत होता जा रहा है. मंगलवार को शिवसेना के 12 सांसद लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला से मिले और उन्होंने लोकसभा में फ्लोर लीडर को बदलने का अनुरोध किया. इस दौरान मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी मौजूद रहे. यह साफ है कि इन सभी सांसदों ने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के गुट का साथ छोड़ दिया है और शिंदे गुट के साथ आ गए हैं.

मंगलवार को ही इन सभी सांसदों को Y श्रेणी की सुरक्षा भी दी गई है. इनके सांसद आवास और दफ्तरों पर भी सुरक्षा पुख्ता कर दी गई है. सांसदों ने लोकसभा स्पीकर से अनुरोध किया है कि वह लोकसभा में शिवसेना के फ्लोर लीडर के रूप में विनायक राउत की जगह राहुल शेवाल को नियुक्त करें.

जो हालिया घटनाएं देखने को मिल रही है उससे यह साफ है कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना पर पकड़ कमजोर होती जा रही है और तमाम बड़े नेता लगातार उनका साथ छोड़ कर जा रहे हैं. राष्ट्रपति के चुनाव में उद्धव ठाकरे को एकनाथ शिंदे गुट के दबाव में आकर द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करना पड़ा था. लेकिन उसके बाद भी उद्धव ठाकरे की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं.

शिवसेना के भीतर चल रहे इस सियासी घमासान में अब सबकी नजर चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हुई है. सुप्रीम कोर्ट में शिवसेना की ओर से दायर की गई कई याचिकाओं पर बुधवार को सुनवाई होगी. जबकि चुनाव आयोग में असली शिवसेना किसकी है इसे लेकर भी आने वाले दिनों में जबरदस्त घमासान देखने को मिल सकता है. कुल मिलाकर देखना यह होगा कि शिवसेना ठाकरे परिवार के पास रहती है या उद्धव ठाकरे से शिवसेना की कमान भी छीन ली जाएगी.

दूसरी तरफ बात करें तो उद्धव ठाकरे ने पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों की बैठक बुलाई है. साथ ही महानगर पालिका अध्यक्षों को भी इस मीटिंग में शामिल रहने का निर्देश दिया गया है. विधायकों की बगावत के बाद उद्धव ने 29 जून को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था.

संजय राउत के पिछले दिनों दिए गए बयानों को अगर आधार बनाया जाए तो आने वाले दिनों में शिवसेना के सिंबल की लड़ाई बड़े स्तर पर देखने को मिल सकती है. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने दावा किया है कि महाराष्ट्र की जनता उनकी सरकार से खुश है. लेकिन यह तो चुनाव के वक्त ही पता चलेगा कि शिवसेना को तोड़ देने से महाराष्ट्र की जनता एकनाथ शिंदे से कितना खुश है. चुनाव के वक्त ही पता चलेगा कि महाराष्ट्र की जनता या फिर शिवसेना के समर्थक उद्धव ठाकरे के साथ जाते हैं या फिर एकनाथ शिंदे के.

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